Mantra தமிழ் (Tamil) Krishna

Vishnu Shanti Mantra (Shantakaram Bhujagashayanam)

Vishnu Shanti Mantra (Shantakaram Bhujagashayanam) in Tamil (Vishnu Shanti Mantra (Shantakaram Bhujagashayanam))

सम्पूर्ण Vishnu Shanti Mantra (Shantakaram Bhujagashayanam) in Tamil (Vishnu Shanti Mantra (Shantakaram Bhujagashayanam)) मूल मंत्र, English Transliteration एवं अर्थ सहित DevDhun पर पढ़ें।

Vishnu Shanti Mantra (Shantakaram Bhujagashayanam) - Tamil
Text:
புனித மந்திரம்
ஶாந்தாகாரம் புஜகஶயநம் பத்மநாபம் ஸுரேஶம்।
விஶ்வாதாரம் ககநஸத்ருஶம் மேகவர்ணம் ஶுபாங்கம்।
லக்ஷ்மீகாந்தம் கமலநயநம் யோகிபிர்த்யாநகம்யம்।
வந்தே விஷ்ணும் பவபயஹரம் ஸர்வலோகைகநாதம்॥
Sacred Mantra (Transliteration)
Vishnu Shanti Mantra
Shantakaram Bhujagashayanam Padmanabham Suresham|
Vishvadharam Gaganasadrisham Meghavarnam Shubhangam|
Lakshmikantam Kamalanayanam Yogibhirdhyanagamyam|
Vande Vishnum Bhavabhayaharam Sarvalokaikanatham
புனித மந்திரம் (Dual View)
ஶாந்தாகாரம் புஜகஶயநம் பத்மநாபம் ஸுரேஶம்।
Vishnu Shanti Mantra
விஶ்வாதாரம் ககநஸத்ருஶம் மேகவர்ணம் ஶுபாங்கம்।
லக்ஷ்மீகாந்தம் கமலநயநம் யோகிபிர்த்யாநகம்யம்।
வந்தே விஷ்ணும் பவபயஹரம் ஸர்வலோகைகநாதம்॥
புனித மந்திரம் (விளக்கம்)
ஶாந்தாகாரம் புஜகஶயநம் பத்மநாபம் ஸுரேஶம்।
Vishnu Shanti Mantra
விஶ்வாதாரம் ககநஸத்ருஶம் மேகவர்ணம் ஶுபாங்கம்।
லக்ஷ்மீகாந்தம் கமலநயநம் யோகிபிர்த்யாநகம்யம்।
வந்தே விஷ்ணும் பவபயஹரம் ஸர்வலோகைகநாதம்॥
விளக்கம் (Spiritual Meaning & Significance)
शान्ताकारं भुजगशयनं: जिनका स्वरूप अत्यंत शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर विराजमान हैं।
पद्मनाभं सुरेशं: जिनकी नाभि में कमल है और जो समस्त देवों के स्वामी हैं।
विश्वाधारं गगनसदृशं: जो संपूर्ण ब्रह्मांड के आधार हैं और आकाश के समान सर्वव्यापी हैं।
मेघवर्णं शुभाङ्गम्: जिनका वर्ण बादलों के समान मनमोहक है और जिनके अंग-प्रत्यंग अत्यंत सुंदर हैं।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं: जो माता लक्ष्मी के स्वामी हैं और जिनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं।
योगिभिर्ध्यानगम्यम्: जिन्हें योगी पुरुष अपने ध्यान में प्राप्त करते हैं।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं: ऐसे संसार के समस्त भयों का नाश करने वाले श्री विष्णु को मैं नमन करता हूँ।
सर्वलोकैकनाथम्: जो समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी हैं।

விளக்கம் (Spiritual Wisdom & Summary)

॥ लाइन-बाय-लाइन भावार्थ (अर्थ) ॥

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शान्ताकारं भुजगशयनं: जिनका स्वरूप अत्यंत शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर विराजमान हैं।
पद्मनाभं सुरेशं: जिनकी नाभि में कमल है और जो समस्त देवों के स्वामी हैं।
विश्वाधारं गगनसदृशं: जो संपूर्ण ब्रह्मांड के आधार हैं और आकाश के समान सर्वव्यापी हैं।
मेघवर्णं शुभाङ्गम्: जिनका वर्ण बादलों के समान मनमोहक है और जिनके अंग-प्रत्यंग अत्यंत सुंदर हैं।
लक्ष्मीकान्तं कमलनयनं: जो माता लक्ष्मी के स्वामी हैं और जिनके नेत्र कमल के समान सुंदर हैं।
योगिभिर्ध्यानगम्यम्: जिन्हें योगी पुरुष अपने ध्यान में प्राप्त करते हैं।
वन्दे विष्णुं भवभयहरं: ऐसे संसार के समस्त भयों का नाश करने वाले श्री विष्णु को मैं नमन करता हूँ।
सर्वलोकैकनाथम्: जो समस्त लोकों के एकमात्र स्वामी हैं।