संध्या वंदन से स्वास्थ्य लाभ
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में प्राणायाम और सूर्य को अर्घ्य देने से नेत्र ज्योति बढ़ती है, विटामिन डी प्राप्त होता है और मानसिक तनाव से पूर्ण मुक्ति मिलती है।
प्रत्येक सनातनी के लिए त्रिकाल संध्या (प्रातः, मध्याह्न, सायं) का आध्यात्मिक महत्त्व, आचमन, प्राणायाम, मार्जन, अघमर्षण और गायत्री महामंत्र के १०८ जप का फल।
दैनिक संध्या वंदन और गायत्री जप से मनुष्य की मेधा बुद्धि, एकाग्रता और आत्म-बल में अभूतपूर्व वृद्धि होती है। यह आत्मा का परमात्मा के साथ दैनिक मिलन है।
प्रातःकाल ब्रह्ममुहूर्त में प्राणायाम और सूर्य को अर्घ्य देने से नेत्र ज्योति बढ़ती है, विटामिन डी प्राप्त होता है और मानसिक तनाव से पूर्ण मुक्ति मिलती है।