Articles & Guides Shiva शुक्लयजुर्वेद रुद्राष्टाध्यायी एवं शिव पुराण

रुद्राभिषेक की संपूर्ण विधि, पूजन सामग्री एवं शिव कृपा के फल

भगवान भोलेनाथ के शिवलिंग का पवित्र द्रव्यों (दूध, दही, घी, शहद, गन्ने का रस, गंगाजल) द्वारा अभिषेक करने की वैदिक विधि, विभिन्न द्रव्यों के फल एवं महाशिवरात्रि/सावन का महत्त्व।

रुद्राभिषेक की संपूर्ण विधि, पूजन सामग्री एवं शिव कृपा के फल
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रुद्राभिषेक विधि एवं महत्त्व

'रुद्राभिषेक' का शाब्दिक अर्थ है—भगवान रुद्र (शिव) का अभिषेक करना। शुक्लयजुर्वेदीय रुद्राष्टाध्यायी के पावन वेदमंत्रों के सस्वर पाठ के साथ शिवलिंग पर विभिन्न द्रव्यों की अविरल धारा अर्पित करने से महादेव अत्यंत शीघ्र प्रसन्न होते हैं।

अभिषेक के प्रमुख द्रव्य एवं उनके पुण्य फल:
१. जल एवं गंगाजल: मानसिक शांति, मोक्ष और समस्त पापों का नाश।
२. गाय का कच्चा दूध: आरोग्य, दीर्घायु और संतान सुख की प्राप्ति।
३. देशी खांड व शहद: मधुर वाणी, आकर्षण और पापों का निवारण।
४. गाय का शुद्ध घृत (घी): वंश वृद्धि और रोगों से मुक्ति।
५. गन्ने का रस (इक्षु रस): लक्ष्मी प्राप्ति और व्यापार-व्यवसाय में अपार समृद्धि।
६. सुगंधित इत्र व भस्म: कीर्ति, मान-सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति।

रुद्राभिषेक विधि:
सर्वप्रथम पूर्वाभिमुख या उत्तराभिमुख होकर आसन पर बैठें। आचमन, प्राणायाम और स्वस्तिवाचन करें। गणपति पूजन और गौरी पूजन के पश्चात शिवलिंग का पंचामृत से स्नान कराएं। तत्पश्चात महामृत्युंजय मंत्र अथवा "ॐ नमः शिवाय" का जप करते हुए लगातार श्रृंगी अथवा कलश से धार बांधकर अभिषेक करें। अंत में बेलपत्र, शमीपत्र, धतूरा, आक के पुष्प और भस्म अर्पित कर शिव आरती करें।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

रुद्राभिषेक से व्यक्ति के प्रारब्ध जनित ग्रह दोष (विशेषकर कालसर्प, शनि की साढ़ेसाती और चंद्र दोष) शांत होते हैं और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।

रुद्राभिषेक का आध्यात्मिक रहस्य

भगवान शिव जलधाराप्रिय हैं—"जलेन तृप्यते रुद्रः"। शिवलिंग पर गिरती जल की एक-एक बूंद मन के संतापों को शांत कर शांति और विवेक का संचार करती है।