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घर के पूजा घर (मंदिर) के वास्तु नियम — सुख, शांति और समृद्धि के उपाय

घर में मंदिर किस दिशा में होना चाहिए? मूर्तियों की दिशा, दीपक का मुख, पूजा करते समय मुख किस ओर रखें और कौन सी गलतियों से घर में नकारात्मकता आती है।

घर के पूजा घर (मंदिर) के वास्तु नियम — सुख, शांति और समृद्धि के उपाय
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घर के पूजा घर (मंदिर) के वास्तु नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर का मंदिर सकारात्मक ऊर्जा का मुख्य केंद्र होता है। यदि पूजा घर सही दिशा और विधि से स्थापित हो, तो घर में सुख, शांति, आरोग्य और समृद्धि का स्थायी वास होता है।

प्रमुख वास्तु नियम:
१. सर्वश्रेष्ठ दिशा: घर का मंदिर सदैव 'ईशान कोण' (उत्तर-पूर्व दिशा) में होना चाहिए। यह देवताओं की दिशा मानी जाती है। यदि ईशान कोण संभव न हो, तो पूर्व या उत्तर दिशा दूसरा श्रेष्ठ विकल्प है।
२. पूजा करते समय मुख: पूजा करते समय मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए।
३. मूर्तियों का आकार: घर के मंदिर में मूर्तियों का आकार अंगूठे के पोर से लेकर अधिकतम ६ से ८ इंच तक ही होना चाहिए।
४. दीपक का मुख: घी का दीपक देवताओं की दाईं ओर तथा तेल का दीपक बाईं ओर रखना चाहिए। दीपक का मुख पूर्व या उत्तर की ओर हो।
५. क्या न रखें: खंडित मूर्तियां, उग्र रूप की तस्वीरें, मृत पूर्वजों (पितरों) के चित्र मंदिर में कभी न रखें। मंदिर के ऊपर कोई भारी सामान न रखें।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

घर का मंदिर केवल एक स्थान नहीं, अपितु परिवार के सदस्यों के मानसिक संतुलन, आपसी प्रेम और सकारात्मक विचारों का ऊर्जा-केंद्र है।

ईशान कोण ही क्यों?

पृथ्वी का चुंबकीय खिंचाव उत्तर-पूर्व दिशा की ओर होता है। प्रातःकाल सूर्य की प्रथम आरोग्यदायी किरणें इसी कोण से प्रवेश करती हैं, जो वातावरण को शुद्ध करती हैं।