Devotional Quotes आचार्य चाणक्य — चाणक्य नीति (३.३)

दुर्जनस्य च सर्पस्य — संगति का महत्व

दुष्ट व्यक्ति और सर्प में सर्प कहीं भला है; क्योंकि सर्प केवल काल आने पर डसता है, किंतु दुर्जन पग-पग पर डसता है।

Inspiration

दुर्जनस्य च सर्पस्य वरं सर्पो न दुर्जनः।
सर्पो दंशति काले तु दुर्जनस्तु पदे पदे॥

Durjanasya cha sarpasya varam sarpo na durjanah |
Sarpo danshati kale tu durjanas tu pade pade ||

— आचार्य चाणक्य — चाणक्य नीति (३.३)

भावार्थ एवं आध्यात्मिक रहस्य (Hindi Meaning)

दुष्ट व्यक्ति और विषधर सर्प की तुलना में सर्प को श्रेष्ठ समझना चाहिए, क्योंकि सर्प केवल संकट या छेड़े जाने पर ही एक बार डसता है, किंतु दुष्ट व्यक्ति कदम-कदम पर घात लगाकर हानि पहुंचाता है।


English Meaning & Wisdom:

Between a wicked person and a venomous serpent, the serpent is indeed better; for the serpent bites only when provoked by destiny, but the wicked person harms you at every step.