कलियुग में सबसे सरल, सुलभ और समस्त संकटों को हरने वाली उपासना 'श्री सत्यनारायण व्रत' है। स्कन्द पुराण के रेवाखण्ड में महर्षि वेदव्यास जी ने सूत जी के माध्यम से ऋषियों को बताया है कि कलियुग में सत्य का आचरण और सत्यनारायण भगवान की पूजा ही कल्पवृक्ष के समान फलदायी है।
१. श्रेष्ठ समय एवं मुहूर्त:
श्री सत्यनारायण पूजा के लिए प्रत्येक माह की पूर्णिमा तिथि, संक्रांति, गुरुवार अथवा किसी भी नए कार्य की शुरुआत (गृह प्रवेश, विवाह, संतान जन्म) का दिन सर्वोत्तम माना गया है। यह पूजा विशेष रूप से प्रदोष काल (सायंकाल) में की जाती है।
२. पूजा स्थल एवं चौकी स्थापना:
* पूर्व या उत्तर दिशा में गोबर या गंगाजल से भूमि शुद्ध करें।
* लकड़ी की सुंदर चौकी पर पीला या लाल रेशमी वस्त्र बिछाएं।
* चौकी के चारों कोनों पर केले के चार खंभे बांधकर भव्य मंडप बनाएं।
* केंद्र में श्री सत्यनारायण भगवान (शालिग्राम या श्री लक्ष्मीनारायण) की प्रतिमा स्थापित करें।
* चौकी पर अक्षत से अष्टदल कमल बनाकर उस पर तांबे या पीतल का कलश स्थापित करें। कलश में आम के पत्ते, सुपारी, सिक्का और जल भरें तथा ऊपर नारियल रखें।
३. विशेष प्रसाद (पंजीरी व चरणामृत) निर्माण विधि:
(क) पंजीरी (सपाद भक्ष्य): गेहूं के आटे को गाय के शुद्ध घी में धीमी आंच पर सुनहरा होने तक भूनें। ठंडा होने पर इसमें पिसी हुई शर्करा (बूरा), बारीक कटे काजू, बादाम, किशमिश, मखाना और तुलसी पत्र अवश्य मिलाएं।
(ख) पंचामृत (चरणामृत): गाय का कच्चा दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल और तुलसी दल मिलाकर तैयार करें। बिना तुलसी पत्र के भगवान सत्यनारायण भोग स्वीकार नहीं करते।
(ग) ऋतुफल: केले के फल का भोग लगाना अत्यंत आवश्यक माना गया है।
४. व्रत एवं पूजा की प्रमुख विधि:
१. सर्वप्रथम पवित्रीकरण, स्वस्तिवाचन और व्रत का संकल्प लें।
२. विघ्नहर्ता गणेश जी, नवग्रह और कुलदेवता का ध्यान व पूजन करें।
३. भगवान सत्यनारायण का पंचामृत से अभिषेक कराएं और पीला चंदन, पीले पुष्प व तुलसी मंजरी अर्पित करें।
४. घी का दीपक प्रज्वलित कर धूप-दीप दिखाएं।
५. पूरे परिवार सहित शांत चित्त होकर 'श्री सत्यनारायण व्रत कथा' के पांचों अध्यायों का श्रवण करें।
६. कथा के पश्चात भगवान की महाआरती करें और सभी उपस्थित भक्तों में चरणामृत व पंजीरी का प्रसाद श्रद्धापूर्वक वितरित करें।
Articles & Guides
Krishna
स्कन्द पुराण (रेवाखण्ड)
सत्यनारायण पूजा विधि
श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि — सामग्री सूची, चौकी स्थापना एवं पंजीरी भोग नियम
पूर्णिमा या संक्रांति पर श्री सत्यनारायण व्रत की संपूर्ण विधि: चौकी सजाने से लेकर कलश स्थापना, आटे की पंजीरी का प्रसाद, चरणामृत बनाने के नियम एवं कथा श्रवण का आध्यात्मिक फल।
Articles & Guides
स्कन्द पुराण (रेवाखण्ड)
श्री सत्यनारायण व्रत एवं पूजा विधि
कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य
भगवान सत्यनारायण कोई अन्य नहीं, बल्कि साक्षात् परमब्रह्म 'सत्य' हैं। इस कथा का मूल संदेश है कि मनुष्य अपने व्यापार, परिवार और समाज में सत्य का पालन करे। जो व्यक्ति सत्य से विमुख होता है या दंभ करता है (जैसे साधु वैश्य और राजा तुंगध्वज की कथा में हुआ), उसे कष्ट झेलने पड़ते हैं; और जो सत्य को धारण करता है, वह समस्त ऐश्वर्य पाकर अंत में विष्णु लोक को प्राप्त होता है।