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दीपावली महालक्ष्मी एवं श्री गणेश विधिवत पूजन विधि — शुभ चौघड़िया मुहूर्त व दीपदान

दीपावली की पावन रात्रि में माता महालक्ष्मी, भगवान गणेश और कुबेर देव की शास्त्रीय पूजन विधि। जानें स्थिर लग्न का महत्त्व, दीपदान के नियम, श्री सूक्त पाठ और धन-समृद्धि की प्राप्ति के उपाय।

दीपावली महालक्ष्मी एवं श्री गणेश विधिवत पूजन विधि — शुभ चौघड़िया मुहूर्त व दीपदान
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दीपावली महालक्ष्मी एवं गणेश पूजन विधि

दीपावली (कार्तिक कृष्ण अमावस्या) सनातन संस्कृति का सबसे दिव्य और प्रकाशमय महापर्व है। इस पावन रात्रि को 'कालरात्रि' और 'सुखरात्रि' भी कहा जाता है। इस रात्रि में समुद्र मंथन से प्रकट हुई आदिमाया भगवती महालक्ष्मी भूलोक पर भ्रमण करती हैं और जिस घर में पवित्रता, प्रकाश और श्रद्धा होती है, वहां स्थिर रूप से वास करती हैं।

१. स्थिर लग्न एवं प्रदोष काल का महत्त्व:
दीपावली पूजन सदैव 'प्रदोष काल' (सूर्यास्त के बाद के २ घंटे २४ मिनट) तथा 'वृषभ' या 'सिंह' जैसे स्थिर लग्न में करना सर्वश्रेष्ठ होता है। स्थिर लग्न में पूजन करने से लक्ष्मी जी घर में स्थिर रूप से निवास करती हैं, चंचलता से पलायन नहीं करतीं।

२. चौकी की सही दिशा एवं मूर्ति स्थापना नियम:
* उत्तर दिशा कुबेर की और ईशान कोण देव दिशा है। पूजा की चौकी को उत्तर या पूर्व दिशा में स्थापित करें।
* चौकी पर नया लाल रेशमी वस्त्र बिछाएं।
* भगवान गणेश को माता लक्ष्मी के बाईं ओर (Left Side) स्थापित करें, क्योंकि गणेश जी उनके मानस पुत्र हैं।
* माता लक्ष्मी के दाईं ओर धन के अधिपति कुबेर जी और सरस्वती माता का चित्र या यंत्र स्थापित करें।
* चौकी पर नवग्रह और कलश की विधिवत स्थापना करें।

३. आवश्यक विशिष्ट पूजन सामग्री:
* कमलगट्टा, पीली कौड़ियां (११ संख्या), गोमती चक्र (५ या ७ संख्या)।
* चांदी के लक्ष्मी-गणेश सिक्के, एकाक्षी नारियल।
* खील, बताशे, मोतीचूर के लड्डू और सफेद मिष्ठान्न (खीर)।
* लाल गुलाब, कमल का पुष्प और अशोक/आम के पत्तों का तोरण।
* शुद्ध गाय का घी, तिल का तेल, मिट्टी के २१ अथवा ५१ दीपक।

४. पूजन का क्रमबद्ध विधान:
१. दीपक प्रज्वलन: सबसे पहले एक बड़ा चौमुखा दीपक (अखंड दीप) शुद्ध घी अथवा तिल के तेल का जलाएं जो पूरी रात्रि प्रज्वलित रहे।
२. आचमन व पवित्रीकरण: 'ॐ केशवाय नमः, ॐ नारायणाय नमः, ॐ माधवाय नमः' बोलकर जल ग्रहण करें और हाथ धोएं।
३. संकल्प: हाथ में जल, अक्षत और पुष्प लेकर अपना नाम, गोत्र व दीपावली पूजन का संकल्प लें।
४. गणेश व कलश पूजन: गणेश जी को दूर्वा, मोदक, लाल सिंदूर और कलश को गंध-अक्षत अर्पित करें।
५. महालक्ष्मी आवाहन व अभिषेक: महालक्ष्मी जी को कमलगट्टा, कमल पुष्प, इत्र और लाल वस्त्र अर्पित करें।
६. बही-खाता व तिजोरी पूजन: व्यापारी वर्ग अपनी कलम, बही-खाते और तिजोरी पर रोली से स्वस्तिक व 'शुभ-लाभ' लिखकर पूजन करें।
७. कनकधारा स्तोत्र एवं श्री सूक्त पाठ: लक्ष्मी जी को सर्वाधिक प्रिय 'श्री सूक्त' या 'कनकधारा स्तोत्र' का पाठ करें।
८. दीपदान: पूजा के पश्चात मुख्य द्वार, तुलसी के पौधे, रसोईघर, छत और पानी के स्रोत के पास दीपक स्थापित करें।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

दीपावली केवल धन-दौलत मांगने का पर्व नहीं है। माता लक्ष्मी का वाहन 'उल्लू' अज्ञान और अंधकार का प्रतीक है, जबकि लक्ष्मी जी स्वयं आत्म-प्रकाश और दैवीय संपदा की प्रतीक हैं। जब हम गणेश (सद्बुद्धि) के साथ लक्ष्मी (समृद्धि) की पूजा करते हैं, तो हमारा धन सत्कर्मों और जनकल्याण में लगता है, जिससे वास्तविक जीवन सार्थक होता है।