Articles & Guides Ram वाल्मीकि रामायण एवं श्रीरामचरितमानस (बालकाण्ड) राम नवमी पूजा विधि

श्री राम नवमी पूजा विधि — मध्याह्न १२ बजे जन्मोत्सव, षोडशोपचार पूजन एवं रामरक्षा स्तोत्र

चैत्र शुक्ल नवमी को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम के जन्मोत्सव की संपूर्ण पूजन विधि। मध्याह्न १२:०० बजे का अभिजित मुहूर्त, पंजीरी भोग, पालना झुलाना और रामरक्षा स्तोत्र पाठ का विधान।

श्री राम नवमी पूजा विधि — मध्याह्न १२ बजे जन्मोत्सव, षोडशोपचार पूजन एवं रामरक्षा स्तोत्र
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श्री राम नवमी पूजा विधि एवं जन्मोत्सव

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को संपूर्ण चराचर जगत के स्वामी, मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री रामचंद्र जी का पावन प्राकट्य हुआ था। गोस्वामी तुलसीदास जी श्रीरामचरितमानस में लिखते हैं: 'नौमी तिथि मधु मास पुनीता। सुकल पच्छ अभिजित हरिप्रीता॥ मध्य दिवस अति सीत न घामा। पावन काल लोक बिश्रामा॥'

१. मध्याह्न १२:०० बजे अभिजित मुहूर्त का महत्त्व:
श्री राम का जन्म न तो प्रातः हुआ और न ही रात्रि में; उनका जन्म ठीक मध्याह्न १२:०० बजे 'अभिजित मुहूर्त' में हुआ जब सूर्य अपने पूर्ण तेज पर था। इस समय शीत और घाम दोनों सम थे और समस्त ब्रह्मांड में शांति छा गई थी।

२. पूजन सामग्री एवं तैयारी:
* भगवान श्री राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी (राम दरबार) की प्रतिमा अथवा चित्र।
* बाल रूप राम लल्ला की धातु की सुंदर प्रतिमा एवं छोटा पालना (झूला)।
* पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल)।
* पीले रंग का रेशमी वस्त्र (पीतांबर) और पीला चंदन।
* तुलसी पत्र और कमल अथवा पीले गेंदे के पुष्प।
* विशेष भोग: भुनी हुई धनिए की पंजीरी, पंचमेवा, सोंठ का लड्डू और ऋतुफल।

३. जन्मोत्सव का क्रमबद्ध विधान:
१. प्रातःकाल स्नान करके सूर्य देव को अर्घ्य दें और राम नवमी व्रत का संकल्प लें।
२. ठीक मध्याह्न ११:५५ पर मंदिर में शंख, घंटी और ढोल-नगाड़ों की मंगल ध्वनि प्रारंभ करें।
३. ठीक १२:०० बजे राम लल्ला के प्राकट्य पर पीले पुष्पों की वर्षा करें और स्तुति गान करें:
'भए प्रगट कृपाला दीनदयाला कौसल्या हितकारी।
हरषित महतारी मुनि मन हारी अद्भुत रूप बिचारी॥'
४. बाल राम लल्ला को पंचामृत से स्नान कराएं और पीतांबर वस्त्र पहनाकर पालने में विराजमान कराएं।
५. परिवार के सभी सदस्य श्रद्धापूर्वक बारी-बारी से राम लल्ला का पालना झुलाएं।
६. तुलसी दल युक्त धनिए की पंजीरी और पंचामृत का भोग लगाएं।
७. 'श्री रामरक्षा स्तोत्र' एवं 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करें।
८. अंत में 'श्री रामचंद्र कृपालु भजु मन' की भावपूर्ण आरती कर सभी में प्रसाद वितरित करें।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

भगवान श्री राम केवल एक ऐतिहासिक महापुरुष नहीं, बल्कि सनातन मर्यादा, सत्य, आज्ञाकारिता और करुणा के साक्षात् विग्रह हैं। राम नवमी का पूजन हमें सिखाता है कि कठिन से कठिन विपरीत परिस्थितियों में भी धर्म और मर्यादा का त्याग न करना ही वास्तविक राम-भक्ति है।