Articles & Guides Krishna श्रीमद्भागवत महापुराण (दशम स्कन्ध) जन्माष्टमी लड्डू गोपाल सेवा विधि

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की सेवा — पंचामृत अभिषेक, छप्पन भोग एवं झूला विधि

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की संपूर्ण पूजन विधि। खीरे से प्राकट्य, शंख से पंचामृत अभिषेक, माखन-मिश्री भोग और बाल गोपाल को झूला झुलाने के नियम।

श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की सेवा — पंचामृत अभिषेक, छप्पन भोग एवं झूला विधि
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जन्माष्टमी लड्डू गोपाल सेवा एवं अभिषेक विधि

भाद्रपद मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि और रोहिणी नक्षत्र के पावन संयोग में संपूर्ण जगत को गीता का अमृत देने वाले योगेश्वर भगवान श्री कृष्ण का मथुरा के कारागार में दिव्य प्राकट्य हुआ था। जन्माष्टमी की मध्यरात्रि में बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की सेवा वात्सल्य भाव से की जाती है।

१. खीरे से प्राकट्य की परंपरा (नाल छेदन):
जन्माष्टमी की शाम को डंठल और पत्ते युक्त एक हरा खीरा लाया जाता है। खीरे के ऊपरी भाग को थोड़ा सा काटकर उसमें बाल गोपाल की छोटी विग्रह रखी जाती है। मध्यरात्रि ठीक १२:०० बजे सिक्के से खीरे को डंठल से अलग किया जाता है, जो माता देवकी के गर्भ से बाल कृष्ण के नाल-छेदन और जन्म का प्रतीक है।

२. मध्यरात्रि १२:०० बजे जन्मोत्सव एवं अभिषेक:
१. ठीक १२:०० बजे शंख और घंटी बजाकर 'नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की' का जयघोष करें।
२. दक्षिणावर्ती शंख में शुद्ध गंगाजल और कच्चा दूध भरकर लड्डू गोपाल का अभिषेक करें।
३. तत्पश्चात पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, गंगाजल) से प्रभु को स्नान कराएं।
४. शुद्ध इत्र मिले जल से पुनः स्नान कराकर नर्म तौलिए से पोंछें।

३. श्रृंगार एवं वस्त्र:
* लड्डू गोपाल को नवीन पीतांबर (पीले वस्त्र) धारण कराएं।
* मस्तक पर मोरपंख लगा मुकुट, गले में वैजयंती माला और हाथों में चांदी की बांसुरी सुशोभित करें।
* गोपीचंदन या अष्टगंध का सुंदर त्रिपुंड व तिलक लगाएं।

४. झूला झुलाना एवं नैवेद्य अर्पण:
* फूलों से सजे सुंदर झूले में लड्डू गोपाल को विराजित करें और धीरे-धीरे झूला झुलाएं।
* प्रिय भोग: ताजा माखन-मिश्री, धनिए की पंजीरी, मखाने की खीर, फल और तुलसी दल।
* छप्पन भोग: सामर्थ्यानुसार ५६ प्रकार के सात्विक व्यंजनों का भोग लगाया जाता है।
* आरती: 'आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की' सपरिवार गाएं।
* पारण: मध्यरात्रि पूजन और आरती के पश्चात चरणामृत और फलाहार से व्रत का पारण किया जाता है।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

भगवान श्री कृष्ण ने कारागार के घोर अंधकार और बंदीगृह के बंधनों के बीच जन्म लेकर यह सिखाया कि जब परमात्मा का प्राकट्य हृदय में होता है, तो अज्ञान के सभी ताले स्वतः टूट जाते हैं और भय के रक्षक सो जाते हैं। लड्डू गोपाल की सेवा हमें ईश्वर से भय नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम करना सिखाती है।