Krishna
Hindu Deity

Krishna

Lord Krishna - Supreme Avatar of Compassion and Joy

चालीसा 10 भाषाएँ
Krishna Chalisa in Hindi & English | Shri Krishna Chalisa Lyrics

श्री कृष्ण चालीसा: ४० चौपाइयों का पावन पाठ, हिन्दी भावार्थ, English Transliteration एवं Audio सहित।

स्तोत्र 10 भाषाएँ
Krishnashtakam Lyrics in Sanskrit, English & Meaning | Vasudeva Sutam Devam

आदि शंकराचार्य विरचित पावन श्रीकृष्णाष्टकम् — वसुदेवसुतं देवं कंसचाणूरमर्दनम् श्लोक, हिंदी भावार्थ एवं अंग्रेजी अर्थ।

स्तोत्र 10 भाषाएँ
Madhurashtakam Lyrics in Sanskrit, English & Meaning | Adharam Madhuram Vadanam Madhuram

महाप्रभु वल्लभाचार्य विरचित सम्पूर्ण श्री मधुराष्टकम् (Madhurashtakam - Adharam Madhuram Vadanam Madhuram) मूल ८ श्लोक, English Transliteration एवं हिन्दी भावार्थ सहित DevDhun पर पढ़ें।

१०৮ नामावली 10 भाषाएँ
Krishna 108 Names Lyrics in Sanskrit, English & Meaning | Ashtottara Shatanamavali

भगवान श्री कृष्ण के सम्पूर्ण १०८ पावन नाम (Krishna 108 Names) मूल मन्त्र, English Transliteration एवं सम्पूर्ण हिन्दी भावार्थ सहित DevDhun पर पढ़ें।

आरती 10 भाषाएँ
Aarti Kunj Bihari Ki

Shri Krishna Aarti Kunj Bihari Ki Shri Goverdhan Dhari Ki lyrics.

मंत्र 10 भाषाएँ
Hare Krishna Mahamantra

कलियुग में परम कल्याणकारी एवं भक्ति भाव बढ़ाने वाला हरे कृष्ण महामंत्र।

भजन
Achyutam Keshavam Krishna Damodaram

Soulful Lord Krishna bhajan Achyutam Keshavam with full lyrics in Hindi & English transliteration.

भजन
Shri Krishna Govind Hare Murari

पावन श्री कृष्ण भजन: श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण वासुदेवा।

लेख व कथा
एकादशी व्रत के नियम, सम्पूर्ण महात्म्य एवं पारण विधि

वर्ष की सभी २४ एकादशियों का महत्त्व, चावल न खाने का वैज्ञानिक एवं पौराणिक कारण, दशमी से लेकर द्वादशी तक के आचार-नियम और हरिवासर में पारण की विधि।

लेख व कथा
गोवर्धन पूजा एवं इंद्र मान-भंग कथा — कनिष्ठा अंगुली पर गिरिराज धारण

ब्रजवासियों द्वारा इंद्र यज्ञ की प्राचीन परंपरा, भगवान श्री कृष्ण द्वारा प्रकृति और गोवर्धन पर्वत की पूजा का उपदेश, कुपित इंद्र द्वारा प्रलयंकारी संवर्तक मेघों की वर्षा, और सात दिनों तक पर्वत धारण की अद्भुत लीला।

लेख व कथा
तुलसी विवाह पूजा विधि, शुभ मुहूर्त एवं शालिग्राम पूजन के नियम

कार्तिक शुक्ल एकादशी और द्वादशी पर तुलसी विवाह की संपूर्ण विधि। जानें शालिग्राम जी के साथ तुलसी का गठबंधन, कन्यादान का पुण्य, मंगलाष्टक और विवाह के आवश्यक नियम।

लेख व कथा
भक्त ध्रुव की अमर तपस्या कथा — अटल विश्वास और ध्रुवतारे की प्राप्ति

पांच वर्ष के अबोध बालक ध्रुव का सौतेली मां सुरुचि द्वारा अपमान, मां सुनीति की पावन सीख, मधुवन में कठोर तपस्या, और भगवान नारायण द्वारा अटल ध्रुव लोक का वरदान।

लेख व कथा
श्री कृष्ण और सुदामा की दिव्य मित्रता कथा — चावल की पोटली और द्वारका का वैभव

उज्जयिनी के सांदीपनि आश्रम में सहपाठी कृष्ण-सुदामा का बाल सखा भाव, दरिद्रता में पत्नी सुशीला की प्रेरणा, चार मुट्ठी भुने तंदुल (चावल), और द्वारकाधीश द्वारा अश्रुओं से चरण प्रक्षालन की अमर कथा।

लेख व कथा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी एवं कंस वध कथा — कारागार में अवतार और धर्म की स्थापना

मथुरा के अत्याचारी राजा कंस का आतंक, देवकी-वसुदेव के विवाह पर आकाशवाणी, भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की घनघोर वर्षा में कारागार में कन्हैया का जन्म, यमुना पार गोकुल गमन और कंस उद्धार।

लेख व कथा
श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर लड्डू गोपाल की सेवा — पंचामृत अभिषेक, छप्पन भोग एवं झूला विधि

भाद्रपद कृष्ण अष्टमी की मध्यरात्रि में भगवान श्री कृष्ण के जन्मोत्सव की संपूर्ण पूजन विधि। खीरे से प्राकट्य, शंख से पंचामृत अभिषेक, माखन-मिश्री भोग और बाल गोपाल को झूला झुलाने के नियम।

अन्य
अनन्याश्चिन्तयन्तो मां — योगक्षेमं वहाम्यहम्

जो अनन्य भाव से ईश्वर का चिंतन करते हैं, उनके योग और क्षेम की संपूर्ण चिंता स्वयं भगवान वहन करते हैं।

अन्य
ईश्वरः सर्वभूतानां — अंतर्यामी परमात्मा

परमेश्वर सभी प्राणियों के हृदय में विराजमान हैं और अपनी माया से इस संसार रूपी चक्र को चला रहे हैं।

अन्य
कर्मण्येवाधिकारस्ते — निष्काम कर्म योग

कर्म पर तुम्हारा अधिकार है, फल पर कभी नहीं। फल की इच्छा से रहित होकर केवल कर्तव्य का पालन करो।

अन्य
पत्रं पुष्पं फलं तोयं — निष्काम प्रेम का फल

जो भी मुझे प्रेम और भक्ति से एक पत्ता, फूल, फल या केवल जल भी अर्पित करता है, मैं उसे सहर्ष स्वीकार करता हूँ।

अन्य
यदा यदा हि धर्मस्य — अवतार का दिव्य संकल्प

जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब सज्जनों की रक्षा और दुष्टों के विनाश हेतु ईश्वर स्वयं अवतार लेते हैं।

अन्य
सर्वधर्मान्परित्यज्य — संपूर्ण शरणागति

समस्त सांसारिक चिंताओं और धर्मों को छोड़कर केवल एक ईश्वर की शरण में जाने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है।

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