Articles & Guides Hanuman पराशर संहिता एवं श्री रामचरितमानस हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विधि

हनुमान जी को सिन्दूरी चोला चढ़ाने की शास्त्रीय विधि — नियम, सामग्री एवं मंगलवार व्रत महात्म्य

मंगलवार या शनिवार को पवनपुत्र हनुमान जी को चोला चढ़ाने की प्रामाणिक विधि। जानें चमेली का तेल, नारंगी सिंदूर, चांदी का वर्क, जनेऊ, २१ तुलसी पत्रों की माला और ब्रह्मचर्य के आवश्यक नियम।

हनुमान जी को सिन्दूरी चोला चढ़ाने की शास्त्रीय विधि — नियम, सामग्री एवं मंगलवार व्रत महात्म्य
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हनुमान जी को चोला चढ़ाने की विधि एवं नियम

कलियुग में प्रत्यक्ष जाग्रत देवता संकटमोचन श्री हनुमान जी को सिंदूर का चोला चढ़ाना उनकी सर्वोच्च प्रसन्नता प्राप्त करने का सबसे फलदायी उपाय है। वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस में वर्णित है कि जब माता सीता को मांग में सिंदूर लगाते देख हनुमान जी ने कारण पूछा, तो सीता जी ने कहा कि इससे भगवान श्री राम की आयु बढ़ती है और वे प्रसन्न होते हैं। यह सुनकर हनुमान जी ने अपने पूरे शरीर पर सिंदूर पोत लिया। तब से हनुमान जी को सिंदूरी चोला अतिप्रिय है।

१. चोला चढ़ाने का शुभ समय एवं दिन:
चोला चढ़ाने के लिए मंगलवार, शनिवार अथवा हनुमान जयंती का दिन सर्वश्रेष्ठ माना गया है। प्रातःकाल अथवा संध्या समय सूर्यास्त के ठीक बाद चोला चढ़ाना विशेष फलदायी होता है।

२. आवश्यक पूजन सामग्री:
* शुद्ध नारंगी सिंदूर (केसरिया सिंदूर)।
* शुद्ध चमेली का तेल (बिना मिलावट का)।
* चांदी का वर्क (शुद्ध शाकाहारी)।
* नया लाल या नारंगी लंगोट और जनेऊ (यज्ञोपवीत)।
* चमेली का इत्र।
* २१ तुलसी पत्रों की माला (जिस पर पीले चंदन से 'श्री राम' लिखा हो)।
* भोग: मोतीचूर के बूंदी के लड्डू अथवा गुड़-चना और मीठा बनारसी पान (लौंग-इलायची युक्त)।

३. चोला चढ़ाने की क्रमबद्ध शास्त्रीय विधि:
१. स्वच्छता एवं ब्रह्मचर्य: चोला चढ़ाने वाले साधक को पूर्ण ब्रह्मचर्य, शारीरिक व मानसिक पवित्रता का पालन करना चाहिए। केवल पुरुष साधक ही प्रतिमा पर चोला चढ़ाएं।
२. स्नान: सबसे पहले हनुमान जी की प्रतिमा को गंगाजल या स्वच्छ जल से स्नान कराएं।
३. लेप तैयार करना: एक तांबे या चांदी के पात्र में चमेली का तेल डालें और उसमें नारंगी सिंदूर मिलाकर गाढ़ा लेप बनाएं।
४. लेप लगाना: 'ॐ हनुमते नमः' या 'श्री राम जय राम जय जय राम' का निरंतर जप करते हुए चरणों से प्रारंभ करके मस्तक की ओर पूरे शरीर पर लेप लगाएं।
५. चांदी का वर्क: सिंदूर के ऊपर अत्यंत सावधानी से चांदी का वर्क लगाएं।
६. वस्त्र व जनेऊ: हनुमान जी को नया लंगोट बांधें, कंधे पर जनेऊ पहनाएं और इत्र लगाएं।
७. तुलसी माला व भोग: प्रभु के कंठ में २१ तुलसी पत्रों की 'श्री राम' नामांकित माला पहनाएं और बूंदी के लड्डू व मीठे पान का भोग लगाएं।
८. पाठ: चोला चढ़ाने के पश्चात वहीं बैठकर 'बजरंग बाण', 'हनुमान चालीसा' और 'हनुमानाष्टक' का पाठ करें।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

सिंदूर त्याग, समर्पण और तेज का प्रतीक है, जबकि चमेली का तेल शीतलता और सुगंध का। जब हम हनुमान जी को चोला चढ़ाते हैं, तो हम अपने जीवन के सभी भय, रोग, शनि-मंगल के ग्रह दोष और मानसिक संतापों को उनके चरणों में अर्पित कर अभय और असीम आत्मबल का वरदान प्राप्त करते हैं।