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धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि एवं कुबेर देव पूजा विधि — यम दीपदान एवं बर्तन खरीदारी नियम

कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर आयुर्वेद के जनक भगवान धन्वंतरि और कोषाध्यक्ष कुबेर देव की पूजा विधि। जानें यमराज के निमित्त चौमुखा दीपदान, सोना-चांदी/पीतल खरीदारी का शुभ मुहूर्त और आरोग्य लाभ।

धनतेरस पर भगवान धन्वंतरि एवं कुबेर देव पूजा विधि — यम दीपदान एवं बर्तन खरीदारी नियम
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धनतेरस धन्वंतरि एवं कुबेर पूजा विधि

दीपावली महापर्व का शुभारंभ कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी (धनतेरस या धनत्रयोदशी) से होता है। अधिकांश लोग धनतेरस को केवल सोना-चांदी और बर्तन खरीदने का दिन मानते हैं, परंतु वास्तव में यह दिन 'आरोग्य' और 'दीर्घायु' के देवता भगवान धन्वंतरि के प्राकट्य का पावन दिवस है।

१. भगवान धन्वंतरि का प्राकट्य:
समुद्र मंथन के समय भगवान धन्वंतरि हाथ में अमृत से भरा स्वर्ण कलश लेकर प्रकट हुए थे। वे देवताओं के चिकित्सक और आयुर्वेद के प्रवर्तक हैं। सनातन धर्म में कहा गया है: 'पहला सुख निरोगी काया, दूजा सुख घर में हो माया।' अतः धनतेरस पर धन से पहले स्वास्थ्य की पूजा की जाती है।

२. क्या खरीदें और क्या न खरीदें:
* शुभ वस्तुएं: पीतल के बर्तन (धन्वंतरि जी को पीतल प्रिय है), चांदी के सिक्के, साबुत धनिया (धनिए के बीज समृद्धि के प्रतीक हैं), नया झाड़ू (माता लक्ष्मी का वास माना गया है) और मिट्टी के दीपक।
* वर्जित वस्तुएं: कांच की वस्तुएं (राहु का प्रतीक), लोहे की नुकीली वस्तुएं (चाकू, कैंची) और प्लास्टिक का सामान धनतेरस पर नहीं खरीदना चाहिए।

३. यम दीपदान का विधान (अकाल मृत्यु निवारण):
धनतेरस की शाम को यमराज के निमित्त 'यम दीपदान' किया जाता है।
* विधि: गेहूं के आटे से एक चार बत्तियों वाला (चौमुखा) बड़ा दीपक बनाएं।
* उसमें सरसों का तेल भरें और चार बत्तियां प्रज्वलित करें। दीपक में एक कौड़ी या सिक्का डालें।
* घर के सभी सदस्यों के हाथ धुलवाकर इस दीपक को घर के मुख्य द्वार के बाहर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके रख दें।
* प्रार्थना मंत्र: 'मृत्युना पाशदण्डाभ्यां कालेन श्यामया सह। त्रयोदश्यां दीपदानात् सूर्यजः प्रीयतां मम॥' इस दीपदान से परिवार के सदस्यों की अकाल मृत्यु का भय समाप्त होता है।

४. कुबेर व धन्वंतरि पूजा क्रम:
१. शाम को उत्तर दिशा में चौकी लगाकर भगवान धन्वंतरि, कुबेर देव और महालक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
२. धन्वंतरि जी को पीले पुष्प, पीला चंदन और नैवेद्य अर्पित करें।
३. कुबेर देव को साबुत धनिया, अक्षत और कमलगट्टा चढ़ाएं।
४. 'ॐ धन्वन्तरये नमः' एवं 'ॐ यक्षाय कुबेराय वैश्रवणाय धनधान्याधिपतये नमः' मंत्र का जप करें।

कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य

धनतेरस हमें स्मरण कराता है कि यदि शरीर अस्वस्थ है, तो संसार का समस्त वैभव और धन व्यर्थ है। आरोग्य ही सबसे बड़ा धन है। जब स्वास्थ्य उत्तम होता है, तभी मनुष्य धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष के पुरुषार्थ को सिद्ध कर सकता है।