कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को अखंड सौभाग्य, दांपत्य प्रेम और पति की दीर्घायु हेतु रखा जाने वाला 'करवा चौथ व्रत' सनातन नारी शक्ति और समर्पण का अनुपम प्रतीक है। इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत रखकर माता गौरी, भगवान शिव, कार्तिकेय और गणेश जी की आराधना करती हैं।
१. सरगी का समय एवं नियम:
करवा चौथ के दिन प्रातःकाल सूर्योदय से पूर्व (ब्रह्ममुहूर्त में लगभग ४ से ५ बजे के मध्य) सास द्वारा अपनी बहू को 'सरगी' दी जाती है। सरगी में मेवे, फल, मिष्ठान्न, मखाने की खीर और सुहाग सामग्री होती है। सरगी ग्रहण करने के पश्चात पूरे दिन अन्न और जल का त्याग करके निर्जला व्रत रखा जाता है।
२. सोलह श्रृंगार एवं संध्या पूजा की तैयारी:
* संध्या समय महिलाएं लाल या पीले रंग के पारंपरिक वस्त्र (साड़ी या लहंगा) धारण कर पूर्ण सोलह श्रृंगार करती हैं।
* दीवार पर गेरू से करवा चौथ का चित्र (करवा माता) बनाया जाता है अथवा कैलेंडर स्थापित किया जाता है।
* मिट्टी के दो करवे लिए जाते हैं (एक में जल और दूसरे में खील-बताशे भरे जाते हैं)। करवे की टोंटी में सींक लगाई जाती है।
३. करवा फेरने एवं कथा श्रवण का विधान:
संध्या समय सभी सुहागिन महिलाएं एकत्रित होकर एक गोल घेरे में बैठती हैं। थाली में जल का लोटा, करवा, धूप-दीप और नैवेद्य रखा जाता है। करवा चौथ की पावन व्रत कथा (साहूकार के सात बेटे और वीरावती की कथा) का श्रवण किया जाता है। कथा के दौरान सात बार करवे को एक-दूसरे के हाथ में घुमाते हुए 'करवा फेरने' का गीत गाया जाता है।
४. चंद्र दर्शन एवं अर्घ्य की शास्त्रीय विधि:
* चंद्रोदय होने पर एक सुंदर सजी हुई छलनी में जलता हुआ घी का दीपक रखा जाता है।
* सबसे पहले छलनी की ओट से चंद्र देवता के दर्शन किए जाते हैं।
* लोटे में जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और रोली मिलाकर चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है।
* इसके पश्चात उसी छलनी से अपने पतिदेव का मुख देखा जाता है और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया जाता है।
* पतिदेव अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिष्ठान्न खिलाकर उनका पावन निर्जला व्रत पूर्ण कराते हैं।
Articles & Guides
Durga
वामन पुराण एवं निर्णय सिन्धु
करवा चौथ व्रत विधि
करवा चौथ संपूर्ण व्रत विधि — सरगी, सोलह श्रृंगार, पूजा सामग्री एवं चंद्र अर्घ्य नियम
कार्तिक कृष्ण चतुर्थी पर सुहागिनों द्वारा रखे जाने वाले करवा चौथ निर्जला व्रत की पूरी विधि। जानें ब्रह्ममुहूर्त सरगी, करवा फेरने का नियम, कथा श्रवण और छलनी से चंद्र दर्शन की परंपरा।
Articles & Guides
वामन पुराण एवं निर्णय सिन्धु
करवा चौथ व्रत विधि एवं चंद्र अर्घ्य
कथा से सीख एवं आध्यात्मिक रहस्य
करवा चौथ केवल एक बाह्य उत्सव नहीं है; यह पति-पत्नी के आत्मिक संबंध, परस्पर त्याग और एक-दूसरे के प्रति समर्पण का महापर्व है। चंद्र देव मन और शीतलता के अधिपति हैं। चंद्रमा को साक्षी मानकर किया गया यह संकल्प दांपत्य जीवन में आजीवन मधुरता और अमर प्रेम का संचार करता है।
संबंधित प्रार्थनाएं एवं स्तोत्र (Related Prayers)
Related Articles & Guides
घर पर पार्थिव या पारद शिवलिंग पूजा विधि — अभिषेक नियम, सामग्री एवं शिव कृपा
Shiva
श्री गणेश पंचोपचार एवं षोडशोपचार दैनिक पूजा विधि — विघ्नहर्ता पूजन नियम
Ganesha
श्री सत्यनारायण व्रत पूजा विधि — सामग्री सूची, चौकी स्थापना एवं पंजीरी भोग नियम
Krishna
दीपावली महालक्ष्मी एवं श्री गणेश विधिवत पूजन विधि — शुभ चौघड़िया मुहूर्त व दीपदान
Lakshmi