Chalisa मराठी (Marathi) Kali

श्री काली चालीसा

श्री काली चालीसा (Kali Chalisa in Marathi)

संपूर्ण श्री काली चालीसा (Kali Chalisa in Marathi) ४० चौपाया, दोहे, मराठी भावार्थ व ऑडिओ सहित DevDhun वर वाचा व ऐका.

श्री काली चालीसा - Marathi
Text:
दोहा
जयति जयति काली कलिमल हरणि, महिमा अमित अपार ।
अति प्रसन्न ह्वै कीजियै, जन को भव से पार ॥
चौपाई
जय काली कंकाल मालिनी । कृपा करहु माता दयालिनी ॥ ॥ १ ॥
जय जय जय काली महारानी । नमो नमो जगदम्ब भवानी ॥ ॥ २ ॥
रक्तबीज वध कारिणि माता । सकल जगत की पालन त्राता ॥ ॥ ३ ॥
चण्ड मुण्ड को मार गिरायो । महिषासुर को तुरत खपायो ॥ ॥ ४ ॥
मुण्डमाल गल बीच बिराजै । खड्ग त्रिशूल हाथ में साजै ॥ ॥ ५ ॥
दन्त पंक्ति चमकै अति भारी । रूप विकराल भयंकर कारी ॥ ॥ ६ ॥
जीभ लपलपावै अति लोला । गर्जन सुन थर-थर जग डोला ॥ ॥ ७ ॥
लह-लह केस बिखरे अति न्यारे । भय पावें सब दानव भारे ॥ ॥ ८ ॥
चारु चतुरभुज रूप सुहावन । सकल सृष्टि को सुख उपजावन ॥ ॥ ९ ॥
अभय वरद कर में झलकावै । दुष्ट दलन निज खड्ग घुमावै ॥ ॥ १० ॥
नर कपाल कर माहिं बिराजै । देखि दनुज कुल अतिशय लाजै ॥ ॥ ११ ॥
कौशिकी रूप धर्यो जग अम्बा । असुर निकन्दन कीन्ह अचम्भा ॥ ॥ १२ ॥
शुम्भ निशुम्भ महा बलवाना । पल महँ कीन्ह तिनहिं निर्वाना ॥ ॥ १३ ॥
धूम्रलोचनहिं तुरत पछारयो । चण्ड मुण्ड को मारि निकारयो ॥ ॥ १४ ॥
रक्तबीज जब भूमिहिं आया । बूंद-बूंद तिन रक्त पिवाया ॥ ॥ १५ ॥
एक बूंद नहिं गिरनहिं दीन्हा । इस प्रकार असुर संहारा कीन्हा ॥ ॥ १६ ॥
देव सकल मिलि बिनती कीन्हीं । तब प्रसन्न मन में ह्वै लीन्हीं ॥ ॥ १७ ॥
शिव के वक्ष चरण जब धरयो । तब संकोच हृदय महँ करयो ॥ ॥ १८ ॥
जीभ निकारी लज्जित भई । भक्तन के हित सौम्य ह्वई ॥ ॥ १९ ॥
दया रूप माता कल्याणी । सबकी विपति निवारण ठानी ॥ ॥ २० ॥
जो नर सुमिरै चरण तिहारे । ताके सकल काज सँवारे ॥ ॥ २१ ॥
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । काली नाम सुनै डर पावै ॥ ॥ २२ ॥
डाकिनी शाकिनी भाग पराहीं । काल कष्ट सब दूर नशाहीं ॥ ॥ २३ ॥
रोग शोक नहिं व्यापै ताही । जेहि माता तव कृपा समाही ॥ ॥ २४ ॥
पुत्रहीन धनहीन जो होई । माता कृपा करै सुख होई ॥ ॥ २५ ॥
विद्या बुद्धि तेज बल पावै । जो नर ध्यान निरंतर लावै ॥ ॥ २६ ॥
कारागार कष्ट मिटि जावै । काली कृपा परम सुख पावै ॥ ॥ २७ ॥
शत्रु दमन होवै सब भाई । माता राखै बांह गहाई ॥ ॥ २८ ॥
निसिदिन ध्यान धरै जो कोई । ताको काज अटका नहिं होई ॥ ॥ २९ ॥
प्रेम सहित जो पाठ सुनावै । मनवांछित फल सो जन पावै ॥ ॥ ३० ॥
मंगल मूरति रूप तिहारी । संकट हरणी सुख विस्तारिणी ॥ ॥ ३१ ॥
कालिका माता तुम वरदानी । सब पर कृपा करहु कल्याणी ॥ ॥ ३२ ॥
महाकाली तुम जग सुख दाता । त्रिभुवन व्यापक तव विख्याता ॥ ॥ ३३ ॥
सकल मनोरथ पूरण कीजै । जन को अभयदान नित दीजै ॥ ॥ ३४ ॥
कलिकाल महँ तुमहिं आधारा । मेटहु जन के कष्ट अपारा ॥ ॥ ३५ ॥
हम अनाथ शरण तिहारी । दया दृष्टि कीजौ महतारी ॥ ॥ ३६ ॥
नहिं जप तप साधन कछु जानौं । केवल चरण कमल पहिचानौं ॥ ॥ ३७ ॥
शरण गहे की लाज निभाओ । महाकाली जन कष्ट नशाओ ॥ ॥ ३८ ॥
मात पिता तुम ही जग अम्बा । तुम बिनु कौन करै अवलम्बा ॥ ॥ ३९ ॥
नमो नमो माता वरदानी । जय जय जय काली महारानी ॥ ॥ ४० ॥
समाप्ती दोहा
समाप्ती दोहा
काली चालीसा पढ़े, जो धरे मन ध्यान ।
सब सुख भोगहिं अंत में, पावे पद निर्वाण ॥
Doha
Jayati jayati kali kalimala harani, mahima amita apara |
Ati prasanna hvai keejiyai, jana ko bhava se para ||
Chaupai
Jaya kali kankala malini | Kripa karahu mata dayalini || 1 ||
Jaya jaya jaya kali maharani | Namo namo jagadamba bhavani || 2 ||
Raktabeeja vadha karini mata | Sakala jagata kee palana trata || 3 ||
Chanda munda ko mara girayo | Mahishasura ko turata khapayo || 4 ||
Mundamala gala beecha birajai | Khadga trishūla hatha mein sajai || 5 ||
Danta pankti chamakai ati bhari | Roopa vikarala bhayankara kari || 6 ||
Jeebha lapalapavai ati lola | Garjana suna thara-thara jaga dola || 7 ||
Laha-laha kesa bikhare ati nyare | Bhaya paven saba danava bhare || 8 ||
Charu chaturbhuja roopa suhavana | Sakala srishti ko sukha upajavana || 9 ||
Abhaya varada kara mein jhalakavai | Dushta dalana nija khadga ghumavai || 10 ||
Nara kapala kara mahin birajai | Dekhi danuja kula atishaya lajai || 11 ||
Kaushikee roopa dharyo jaga amba | Asura nikandana keenha achambha || 12 ||
Shumbha nishumbha maha balavana | Pala mahan keenha tinahin nirvana || 13 ||
Dhoomralochanahin turata pachharyo | Chanda munda ko mari nikaryo || 14 ||
Raktabeeja jaba bhoomihin aya | Boonda-boonda tina rakta piyaya || 15 ||
Eka boonda nahin giranahi deenha | Isa prakara asura samhara keenha || 16 ||
Deva sakala mili binatee keenheen | Taba prasanna mana mein hvai leenheen || 17 ||
Shiva ke vaksha charana jaba dharayo | Taba sankocha hridaya mahan karayo || 18 ||
Jeebha nikari lajjita bhaee | Bhaktana ke hita saumya hvaee || 19 ||
Daya roopa mata kalyanee | Sabakee vipati nivaran thanee || 20 ||
Jo nara sumirai charana tihare | Take sakala kaja samvare || 21 ||
Bhoota pishacha nikata nahin aavai | Kali nama sunai dara pavai || 22 ||
Dakinee shakinee bhaga paraheen | Kala kashta saba doora nashaheen || 23 ||
Roga shoka nahin vyapai tahee | Jehi mata tava kripa samahee || 24 ||
Putraheena dhanaheena jo hoee | Mata kripa karai sukha hoee || 25 ||
Vidya buddhi teja bala pavai | Jo nara dhyana nirantara lavai || 26 ||
Karagara kashta miti javai | Kali kripa parama sukha pavai || 27 ||
Shatru damana hovai saba bhaee | Mata rakhai banha gahaee || 28 ||
Nisidina dhyana dharai jo koee | Tako kaja ataka nahin hoee || 29 ||
Prema sahita jo patha sunavai | Manavanchhita phala so jana pavai || 30 ||
Mangala moorati roopa tiharee | Sankata haranee sukha vistarnee karee || 31 ||
Kalika mata tuma varadanee | Saba para kripa karahu kalyanee || 32 ||
Mahakali tuma jaga sukha data | Tribhuvana vyapaka tava vikhyata || 33 ||
Sakala manoratha poorana keejai | Jana ko abhayadana nita deejai || 34 ||
Kalikala mahan tumahin adhara | Metahu jana ke kashta apara || 35 ||
Hama anatha sharana tiharee | Daya drishti keejau mahataree || 36 ||
Nahin japa tapa sadhana kachhu janon | Kevala charana kamala pahichanon || 37 ||
Sharana gahe kee laja nibhao | Mahakali jana kashta nashao || 38 ||
Mata pita tuma hee jaga amba | Tuma binu kauna karai avalamba || 39 ||
Namo namo mata varadanee | Jaya jaya jaya kali maharanee || 40 ||
Closing Doha
Ending Doha
Kali chalisa padhe, jo dhare mana dhyana |
Saba sukha bhogahin anta mein, pave pada nirvana ||
दोहा (Dual View)
जयति जयति काली कलिमल हरणि, महिमा अमित अपार ।
अति प्रसन्न ह्वै कीजियै, जन को भव से पार ॥
Jayati jayati kali kalimala harani, mahima amita apara |
Ati prasanna hvai keejiyai, jana ko bhava se para ||
चौपाई (Dual View)
जय काली कंकाल मालिनी । कृपा करहु माता दयालिनी ॥ ॥ १ ॥
Jaya kali kankala malini | Kripa karahu mata dayalini || 1 ||
जय जय जय काली महारानी । नमो नमो जगदम्ब भवानी ॥ ॥ २ ॥
Jaya jaya jaya kali maharani | Namo namo jagadamba bhavani || 2 ||
रक्तबीज वध कारिणि माता । सकल जगत की पालन त्राता ॥ ॥ ३ ॥
Raktabeeja vadha karini mata | Sakala jagata kee palana trata || 3 ||
चण्ड मुण्ड को मार गिरायो । महिषासुर को तुरत खपायो ॥ ॥ ४ ॥
Chanda munda ko mara girayo | Mahishasura ko turata khapayo || 4 ||
मुण्डमाल गल बीच बिराजै । खड्ग त्रिशूल हाथ में साजै ॥ ॥ ५ ॥
Mundamala gala beecha birajai | Khadga trishūla hatha mein sajai || 5 ||
दन्त पंक्ति चमकै अति भारी । रूप विकराल भयंकर कारी ॥ ॥ ६ ॥
Danta pankti chamakai ati bhari | Roopa vikarala bhayankara kari || 6 ||
जीभ लपलपावै अति लोला । गर्जन सुन थर-थर जग डोला ॥ ॥ ७ ॥
Jeebha lapalapavai ati lola | Garjana suna thara-thara jaga dola || 7 ||
लह-लह केस बिखरे अति न्यारे । भय पावें सब दानव भारे ॥ ॥ ८ ॥
Laha-laha kesa bikhare ati nyare | Bhaya paven saba danava bhare || 8 ||
चारु चतुरभुज रूप सुहावन । सकल सृष्टि को सुख उपजावन ॥ ॥ ९ ॥
Charu chaturbhuja roopa suhavana | Sakala srishti ko sukha upajavana || 9 ||
अभय वरद कर में झलकावै । दुष्ट दलन निज खड्ग घुमावै ॥ ॥ १० ॥
Abhaya varada kara mein jhalakavai | Dushta dalana nija khadga ghumavai || 10 ||
नर कपाल कर माहिं बिराजै । देखि दनुज कुल अतिशय लाजै ॥ ॥ ११ ॥
Nara kapala kara mahin birajai | Dekhi danuja kula atishaya lajai || 11 ||
कौशिकी रूप धर्यो जग अम्बा । असुर निकन्दन कीन्ह अचम्भा ॥ ॥ १२ ॥
Kaushikee roopa dharyo jaga amba | Asura nikandana keenha achambha || 12 ||
शुम्भ निशुम्भ महा बलवाना । पल महँ कीन्ह तिनहिं निर्वाना ॥ ॥ १३ ॥
Shumbha nishumbha maha balavana | Pala mahan keenha tinahin nirvana || 13 ||
धूम्रलोचनहिं तुरत पछारयो । चण्ड मुण्ड को मारि निकारयो ॥ ॥ १४ ॥
Dhoomralochanahin turata pachharyo | Chanda munda ko mari nikaryo || 14 ||
रक्तबीज जब भूमिहिं आया । बूंद-बूंद तिन रक्त पिवाया ॥ ॥ १५ ॥
Raktabeeja jaba bhoomihin aya | Boonda-boonda tina rakta piyaya || 15 ||
एक बूंद नहिं गिरनहिं दीन्हा । इस प्रकार असुर संहारा कीन्हा ॥ ॥ १६ ॥
Eka boonda nahin giranahi deenha | Isa prakara asura samhara keenha || 16 ||
देव सकल मिलि बिनती कीन्हीं । तब प्रसन्न मन में ह्वै लीन्हीं ॥ ॥ १७ ॥
Deva sakala mili binatee keenheen | Taba prasanna mana mein hvai leenheen || 17 ||
शिव के वक्ष चरण जब धरयो । तब संकोच हृदय महँ करयो ॥ ॥ १८ ॥
Shiva ke vaksha charana jaba dharayo | Taba sankocha hridaya mahan karayo || 18 ||
जीभ निकारी लज्जित भई । भक्तन के हित सौम्य ह्वई ॥ ॥ १९ ॥
Jeebha nikari lajjita bhaee | Bhaktana ke hita saumya hvaee || 19 ||
दया रूप माता कल्याणी । सबकी विपति निवारण ठानी ॥ ॥ २० ॥
Daya roopa mata kalyanee | Sabakee vipati nivaran thanee || 20 ||
जो नर सुमिरै चरण तिहारे । ताके सकल काज सँवारे ॥ ॥ २१ ॥
Jo nara sumirai charana tihare | Take sakala kaja samvare || 21 ||
भूत पिशाच निकट नहिं आवै । काली नाम सुनै डर पावै ॥ ॥ २२ ॥
Bhoota pishacha nikata nahin aavai | Kali nama sunai dara pavai || 22 ||
डाकिनी शाकिनी भाग पराहीं । काल कष्ट सब दूर नशाहीं ॥ ॥ २३ ॥
Dakinee shakinee bhaga paraheen | Kala kashta saba doora nashaheen || 23 ||
रोग शोक नहिं व्यापै ताही । जेहि माता तव कृपा समाही ॥ ॥ २४ ॥
Roga shoka nahin vyapai tahee | Jehi mata tava kripa samahee || 24 ||
पुत्रहीन धनहीन जो होई । माता कृपा करै सुख होई ॥ ॥ २५ ॥
Putraheena dhanaheena jo hoee | Mata kripa karai sukha hoee || 25 ||
विद्या बुद्धि तेज बल पावै । जो नर ध्यान निरंतर लावै ॥ ॥ २६ ॥
Vidya buddhi teja bala pavai | Jo nara dhyana nirantara lavai || 26 ||
कारागार कष्ट मिटि जावै । काली कृपा परम सुख पावै ॥ ॥ २७ ॥
Karagara kashta miti javai | Kali kripa parama sukha pavai || 27 ||
शत्रु दमन होवै सब भाई । माता राखै बांह गहाई ॥ ॥ २८ ॥
Shatru damana hovai saba bhaee | Mata rakhai banha gahaee || 28 ||
निसिदिन ध्यान धरै जो कोई । ताको काज अटका नहिं होई ॥ ॥ २९ ॥
Nisidina dhyana dharai jo koee | Tako kaja ataka nahin hoee || 29 ||
प्रेम सहित जो पाठ सुनावै । मनवांछित फल सो जन पावै ॥ ॥ ३० ॥
Prema sahita jo patha sunavai | Manavanchhita phala so jana pavai || 30 ||
मंगल मूरति रूप तिहारी । संकट हरणी सुख विस्तारिणी ॥ ॥ ३१ ॥
Mangala moorati roopa tiharee | Sankata haranee sukha vistarnee karee || 31 ||
कालिका माता तुम वरदानी । सब पर कृपा करहु कल्याणी ॥ ॥ ३२ ॥
Kalika mata tuma varadanee | Saba para kripa karahu kalyanee || 32 ||
महाकाली तुम जग सुख दाता । त्रिभुवन व्यापक तव विख्याता ॥ ॥ ३३ ॥
Mahakali tuma jaga sukha data | Tribhuvana vyapaka tava vikhyata || 33 ||
सकल मनोरथ पूरण कीजै । जन को अभयदान नित दीजै ॥ ॥ ३४ ॥
Sakala manoratha poorana keejai | Jana ko abhayadana nita deejai || 34 ||
कलिकाल महँ तुमहिं आधारा । मेटहु जन के कष्ट अपारा ॥ ॥ ३५ ॥
Kalikala mahan tumahin adhara | Metahu jana ke kashta apara || 35 ||
हम अनाथ शरण तिहारी । दया दृष्टि कीजौ महतारी ॥ ॥ ३६ ॥
Hama anatha sharana tiharee | Daya drishti keejau mahataree || 36 ||
नहिं जप तप साधन कछु जानौं । केवल चरण कमल पहिचानौं ॥ ॥ ३७ ॥
Nahin japa tapa sadhana kachhu janon | Kevala charana kamala pahichanon || 37 ||
शरण गहे की लाज निभाओ । महाकाली जन कष्ट नशाओ ॥ ॥ ३८ ॥
Sharana gahe kee laja nibhao | Mahakali jana kashta nashao || 38 ||
मात पिता तुम ही जग अम्बा । तुम बिनु कौन करै अवलम्बा ॥ ॥ ३९ ॥
Mata pita tuma hee jaga amba | Tuma binu kauna karai avalamba || 39 ||
नमो नमो माता वरदानी । जय जय जय काली महारानी ॥ ॥ ४० ॥
Namo namo mata varadanee | Jaya jaya jaya kali maharanee || 40 ||
समाप्ती दोहा (Dual View)
समाप्ती दोहा
काली चालीसा पढ़े, जो धरे मन ध्यान ।
सब सुख भोगहिं अंत में, पावे पद निर्वाण ॥
Kali chalisa padhe, jo dhare mana dhyana |
Saba sukha bhogahin anta mein, pave pada nirvana ||

श्री काली चालीसा का परिचय एवं धार्मिक महत्व

सनातन हिन्दू परंपरा में श्री काली चालीसा (Shri Kali Chalisa) आद्याशक्ति भगवती माँ काली की आराधना, स्तुति एवं कृपा प्राप्ति का परम सिद्ध और प्रभावशाली स्तोत्र है। दस महाविद्याओं में प्रथम और प्रमुख देवी के रूप में माँ काली अज्ञान, अहंकार, भय तथा आसुरी प्रवृत्तियों का समूल नाश करने वाली तथा साधक को अभय, आत्मबल और मुक्ति प्रदान करने वाली करुणामयी माता हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त नियमपूर्वक श्रद्धा और पवित्र भाव से श्री काली चालीसा का पाठ करते हैं, उनके जीवन से समस्त प्रकार की नकारात्मक शक्तियां, अकारण भय, मानसिक संताप और संकट दूर होते हैं। इस पृष्ठ पर आपको श्री काली चालीसा का प्रामाणिक देवनागरी हिन्दी पाठ, English Transliteration, द्विभाषी (Dual Language) दृश्य तथा प्रत्येक चौपाई एवं दोहे का पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ (Meaning) उपलब्ध कराया गया है।

माँ काली का स्वरूप एवं पौराणिक संदर्भ

मार्कण्डेय पुराण के श्री दुर्गा सप्तशती एवं देवी भागवत पुराण में माँ काली के प्राकट्य का विस्तार से वर्णन है। जब रक्तबीज, चण्ड-मुण्ड और शुम्भ-निशुम्भ जैसे दुर्दांत असुरों के अत्याचार से देवता और तीनों लोक व्याकुल हो उठे, तब जगदम्बा के भृकुटी से महाप्रचंड स्वरूपा माँ काली प्रकट हुईं।

माँ काली का श्यामल वर्ण अनंत ब्रह्मांड और शून्य चेतना का प्रतीक है। उनके हाथ में खड्ग अज्ञान के छेदन का, त्रिशूल त्रिगुणों के नियमन का, और नरमुंडों की माला मानव अहंकार के संहार का प्रतीक है। भगवान शिव के वक्ष पर माँ का पावन चरण यह दर्शाता है कि शक्ति के बिना शिव निष्क्रिय (शव) हैं और शिव के शांत आधार के बिना शक्ति की प्रचंडता अनियंत्रित है। यह दर्शन अद्वैत तत्व का सर्वोच्च आध्यात्मिक रहस्य उजागर करता है।

श्री काली चालीसा पाठ के प्रमुख धार्मिक महत्व

भय एवं नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा

धार्मिक परंपरा के अनुसार, माँ काली की कृपा से जातक को भय, घबराहट, शत्रु-बाधा और नकारात्मक विचारों से मुक्ति का अनुभव होता है।

मानसिक संताप व आत्मबल

चालीसा के नित्य पाठ से अंतःकरण शुद्ध होता है, आंतरिक संशय दूर होते हैं और साधक को अगाध आत्मिक शक्ति मिलती है।

अहंकार शमन एवं ज्ञानोदय

माँ काली की उपासना साधक के अंतर्मन में स्थित काम, क्रोध, लोभ और अहंकार का शमन कर विवेक और भक्ति का प्रकाश भरती है।

पारिवारिक सुख व मंगलकारी कृपा

श्रद्धालुओं का परंपरागत विश्वास है कि माँ काली अपने शरणागत संतानों की हर विपत्ति में रक्षा कर जीवन में शुभता लाती हैं।

पाठ करने की सरल विधि एवं पूजन परंपराएं

श्री काली चालीसा का पाठ सरल, सात्विक एवं एकाग्र चित्त से करना चाहिए। परंपरा के अनुसार प्रमुख नियम इस प्रकार हैं:

पाठ का उत्तम समय:

प्रातःकाल सूर्योदय के समय अथवा सांध्यकाल (प्रदोष काल) में पाठ करना अत्यंत उत्तम माना गया है। विशेष रूप से मंगलवार, शनिवार, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी एवं अमावस्या की तिथि माँ काली की आराधना के लिए परम फलदायी मानी जाती है।

पूजन सामग्री एवं विधि:

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो लाल अथवा श्वेत) धारण करें।
  2. पूजा स्थान में माँ काली की प्रतिमा या चित्र के समक्ष लाल आसन पर बैठें।
  3. शुद्ध घी अथवा तिल/सरसों के तेल का दीपक प्रज्वलित करें और धूप-दीप अर्पित करें।
  4. माँ को लाल पुष्प (गुड़हल का पुष्प अत्यंत प्रिय है), रोली, अक्षत एवं मिष्ठान्न अथवा गुड़ का भोग लगाएं।
  5. सर्वप्रथम भगवान श्री गणेश का स्मरण करें, तदुपरांत पूर्ण भक्तिभाव से श्री काली चालीसा का सस्वर पाठ करें।
  6. पाठ समापन के पश्चात माँ काली की आरती करें और अपनी भूल-चूक की क्षमा याचना करें।

माँ काली एवं सम्बंधित पावन प्रार्थनाएं

माँ काली एवं शक्ति परंपरा से जुड़े अन्य पावन स्तोत्रों का भी पाठ करें:

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्री काली चालीसा का पाठ अज्ञान, भय, संशय, नकारात्मक ऊर्जा और आंतरिक विकारों से मुक्ति पाने तथा आत्मिक शक्ति व भगवती की कृपा प्राप्ति हेतु किया जाता है।

हाँ, देवधून पर उपलब्ध श्री काली चालीसा में प्रारंभिक दोहा, संपूर्ण ४० चौपाइयां और समापन दोहा पूर्ण प्रामाणिकता एवं शुद्ध पाठ के साथ प्रस्तुत किए गए हैं।

हाँ, गृहस्थ भक्त सात्विक भाव से, पवित्र मन और निष्काम भक्ति के साथ अपने घर में श्री काली चालीसा का नियमित पाठ सरलता से कर सकते हैं।

काली चालीसा का नित्य पाठ उत्तम है, परंतु मंगलवार, शनिवार, अष्टमी, चतुर्दशी एवं अमावस्या की तिथियों पर पाठ करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।

हाँ, देवधून पर श्री काली चालीसा हिन्दी, English Transliteration के साथ-साथ तेलुगु, बंगाली, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तमिल, मलयालम, ओड़िया एवं पंजाबी लिपियों में भी संपूर्ण रूप से उपलब्ध है।
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