Chalisa मराठी (Marathi) Lakshmi

श्री लक्ष्मी चालीसा

श्री लक्ष्मी चालीसा (Lakshmi Chalisa in Marathi)

संपूर्ण श्री लक्ष्मी चालीसा (Lakshmi Chalisa in Marathi) ४० चौपाया, दोहे, मराठी भावार्थ व ऑडिओ सहित DevDhun वर वाचा व ऐका.

श्री लक्ष्मी चालीसा - Marathi
Text:
दोहा Doha दोहा (Dual View) दोहा (भावार्थ)
मातु लक्ष्मी करि कृपा, करो हृदय में वास।
मनोकामना सिद्ध करि, पुरवहु मेरी आस॥
सिंधु सुता विष्णुप्रिये, नत शिर बारंबार।
रिद्धि सिद्धि संपत्ति देहु, करहु कष्ट निवार॥
Maatu Laxmi Kari Kripa, Karo Hriday Men Vaas.
Manokaamna Siddh Kari, Purvahu Meri Aas.
Sindhu Suta Vishnupriye, Nat Shir Baarambaar.
Riddhi Siddhi Sampatti Dehu, Karahu Kasht Nivaar.
चौपाई Chaupai चौपाई (Dual View) चौपाई (भावार्थ)
जय जय श्री महालक्ष्मी भवानी। सब जग पूजित परम प्रधानी॥ ॥ १ ॥
Maatu Laxmi Kari Kripa, Karo Hriday Men Vaas. Manokaamna Siddh Kari, Purvahu Meri Aas.
तुम सम देव दयालु न दूजा। सब देव मुनि करहिं तव पूजा॥ ॥ २ ॥
Sindhu Suta Vishnupriye, Nat Shir Baarambaar. Riddhi Siddhi Sampatti Dehu, Karahu Kasht Nivaar.
तुम ही जग की पालनि हारी। दुख दारिद्र सब हरनि हारी॥ ॥ ३ ॥
|| Chaupai ||
तुम ही अन्नपूर्णा जगदंबा। सब जग की तुम अति अवलंबा॥ ॥ ४ ॥
Jai Jai Shri Mahaalaxmi Bhavaani. Sab Jag Poojit Param Pradhaani.
क्षीरसिंधु में करहु निवासा। दयासिंधु दीजै मन आसा॥ ॥ ५ ॥
Tum Sam Dev Dayaalu Na Dooja. Sab Dev Muni Karahin Tav Pooja.
विष्णुप्रिया तुम परम पुनीता। तुम ही कमला तुम ही सीता॥ ॥ ६ ॥
Tum Hee Jag Ki Paalani Haari. Dukh Daaridra Sab Harani Haari.
रूप सरस्वती का तुम धारा। सब जग को ज्ञान उबारा॥ ॥ ७ ॥
Tum Hee Annapoorna Jagadamba. Sab Jag Ki Tum Ati Avalamba.
तुम ही रिद्धि सिद्धि सब दीन्हीं। सब सुख संपत्ति पावन कीन्हीं॥ ॥ ८ ॥
Ksheersindhu Men Karahu Nivaasa. Dayaasindhu Deejai Man Aasa.
तुम ही उमा पार्वती माता। सब देवत सुख सम्पति दाता॥ ॥ ९ ॥
Vishnupriya Tum Param Puneeta. Tum Hee Kamala Tum Hee Sita.
तुम ही गंगा तुम ही जग जननी। सब पापन को हरनि हारी॥ ॥ १० ॥
Roop Saraswati Ka Tum Dhaara. Sab Jag Ko Gyaan Ubaara.
तुम ही गायत्री सब गुण खानी। सब देवन की तुम परधानी॥ ॥ ११ ॥
Tum Hee Riddhi Siddhi Sab Deenheen. Sab Sukh Sampatti Paawan Keenheen.
तुम ही महाकाली जग माता। सब संकट को हरनि विधाता॥ ॥ १२ ॥
Tum Hee Uma Parvati Maata. Sab Devat Sukh Sampati Daata.
तुम ही महालक्ष्मी सुखदाई। जो यह पाठ करै मन लाई॥ ॥ १३ ॥
Tum Hee Ganga Tum Hee Jag Janani. Sab Paapan Ko Harani Haari.
तुम ही जग की आधार रूपा। तुम ही त्रिभुवन की अति अनूपा॥ ॥ १४ ॥
Tum Hee Gayatri Sab Gun Khaani. Sab Devan Ki Tum Pardhaani.
तुम ही धन धान्य सब दीन्हीं। सब भक्तन को सुख संपत्ति दीन्हीं॥ ॥ १५ ॥
Tum Hee Mahaakaali Jag Maata. Sab Sankat Ko Harani Vidhaata.
ज्ञान बुद्धि सब तुम ही दाता। सब सुख सम्पति मंगल विधाता॥ ॥ १६ ॥
Tum Hee Mahaalaxmi Sukhdaayi. Jo Yah Path Karai Man Lai.
जय जय जय जगदंब भवानी। सब जग पूजित परम प्रधानी॥ ॥ १७ ॥
Tum Hee Jag Ki Aadhaar Roopa. Tum Hee Tribhuvan Ki Ati Anoopa.
क्षीरसिंधु सुता तुम भवानी। विष्णुप्रिया तुम परम पुनीता॥ ॥ १८ ॥
Tum Hee Dhan Dhaanya Sab Deenheen. Sab Bhagatan Ko Sukh Sampatti Deenheen.
जो यह पाठ करै मन लाई। ताके गृह संपत्ति ठहरई॥ ॥ १९ ॥
Gyaan Buddhi Sab Tum Hee Daata. Sab Sukh Sampati Mangal Vidhaata.
प्रात काल उठि पाठ जु करई। ताके गृह संपदा ठहरई॥ ॥ २० ॥
Jai Jai Jai Jagadamb Bhavaani. Sab Jag Poojit Param Pradhaani.
पुत्र हीन जो यह फल पावै। सुंदर सुत ताके घर आवै॥ ॥ २१ ॥
Ksheersindhu Suta Tum Bhavaani. Vishnupriya Tum Param Puneeta.
जो यह पाठ करै चित लाई। ताको संकट निकट न आई॥ ॥ २२ ॥
Jo Yah Path Karai Man Lai. Taake Grih Sampatti Thaharai.
जो यह चालीसा मन लावै। सो बैकुंठ परम पद पावै॥ ॥ २३ ॥
Praat Kaal Uthi Path Ju Karai. Taake Grih Sampada Thaharai.
काम क्रोध मद लोभ नशावै। लक्ष्मी जी ताहि अपनावै॥ ॥ २४ ॥
Putra Heen Jo Yah Phal Pawai. Sundar Sut Taake Ghar Aawai.
सत्य सनातन धर्म संभारे। लक्ष्मी जी ताहि सदा उधारे॥ ॥ २५ ॥
Jo Yah Path Karai Chit Lai. Taako Sankat Nikat Na Aai.
जनम जनम की बिपति नशावै। लक्ष्मी नाम जो निशदिन गावै॥ ॥ २६ ॥
Jo Yah Chalisa Man Lawai. So Baikunth Param Pad Pawai.
लक्ष्मी नाम सब जग में प्यारा। जाके सुमिरन संकट टारा॥ ॥ २७ ॥
Kaam Krodh Mad Lobh Nashawai. Laxmi Ji Tahi Apnawai.
संत सभा महं पाठ करावे। सो बैकुंठ लोक को पावे॥ ॥ २८ ॥
Satya Sanatan Dharm Sambhare. Laxmi Ji Tahi Sada Udhare.
सुंदरदास सदा लक्ष्मी के। लक्ष्मी भक्त की जय जयकार॥ ॥ २९ ॥
Janam Janam Ki Bipati Nashawai. Laxmi Naam Jo Nishdin Gawai.
लक्ष्मी नाम जपते रहौ भाई। अंत काल विष्णुपुर जाई॥ ॥ ३० ॥
Laxmi Naam Sab Jag Men Pyara. Jaake Sumiran Sankat Tara.
लक्ष्मी भक्ति जो मन महं धरिहै। सो भवसागर सहजहिं तरिहै॥ ॥ ३१ ॥
Sant Sabha Mahn Path Karave. So Baikunth Lok Ko Paave.
लक्ष्मी जी की दया जो पावै। सो जन परम सुखद पद पावै॥ ॥ ३२ ॥
Sundardas Sada Laxmi Ke. Laxmi Bhakt Ki Jai Jaikar.
लक्ष्मी नाम जो निशदिन ध्यावै। ताहि न कबहूं दुख उपजावै॥ ॥ ३३ ॥
Laxmi Naam Japte Rahau Bhai. Ant Kaal Vishnupur Jai.
लक्ष्मी नाम पावन अति मीठा। जाके सुमिरन जग सुख दीठा॥ ॥ ३४ ॥
Laxmi Bhakti Jo Man Mahn Dharihai. So Bhavsagar Sahajahin Tarihai.
श्री महालक्ष्मी अष्टकम गावै। सो अष्ट सिद्धि नव निधि पावै॥ ॥ ३५ ॥
Laxmi Ji Ki Daya Jo Pawai. So Jan Param Sukhad Pad Pawai.
महालक्ष्मी की कृपा जो पावै। ताके गृह सब मोद छावै॥ ॥ ३६ ॥
Laxmi Naam Jo Nishdin Dhyawai. Tahi Na Kabhoon Dukh Upjawai.
दीपावली दिन पाठ करावे। ताके गृह संपत्ति नित्य आवे॥ ॥ ३७ ॥
Laxmi Naam Paawan Ati Meetha. Jaake Sumiran Jag Sukh Deetha.
शुक्रवार दिन पाठ जु करई। ताके गृह महालक्ष्मी ठहरई॥ ॥ ३८ ॥
Shri Mahaalaxmi Ashtakam Gaavai. So Asht Siddhi Nav Nidhi Paavai.
महालक्ष्मी चालीसा पावन। सर्व सुखद मंगल मन भावन॥ ॥ ३९ ॥
Mahaalaxmi Ki Kripa Jo Pawai. Taake Grih Sab Mod Chhaavai.
सुंदरदास कही यह बानी। पाठ करै जो निश्चय आनी॥ ॥ ४० ॥
Deepawali Din Path Karave. Taake Grih Sampatti Nitya Aave.
समाप्ती दोहा Closing Doha समाप्ती दोहा (Dual View) समाप्ती दोहा (भावार्थ)
समाप्ती दोहा Ending Doha समाप्ती दोहा समाप्ती दोहा (भावार्थ)
त्राहि त्राहि शरणं प्रपन्ना, दुख दारिद्र निवार।
कृपा दृष्टि माँ देखिये, करहु कष्ट संहार॥
महालक्ष्मी चालीसा पढ़ै, भक्ति भाव चित लाय।
सो नित्य सुख संपत्ति लहै, सकल मनोरथ जाय॥
Traahi Traahi Sharnam Prapanna, Dukh Daaridra Nivaar.
Kripa Drishti Maa Dekhiye, Karahu Kasht Sanhaar.
Mahaalaxmi Chalisa Padhai, Bhakti Bhaav Chit Lay.
So Nity Sukh Sampatti Lahai, Sakal Manorath Jay.

श्री लक्ष्मी चालीसा का महत्त्व एवं आध्यात्मिक महिमा

श्री लक्ष्मी चालीसा (Shri Lakshmi Chalisa) धन, ऐश्वर्य, समृद्धि और अष्ट सिद्धियों की अधिष्ठात्री देवी माता महालक्ष्मी जी की आराधना का एक अत्यंत पावन और सिद्ध स्तोत्र है। सनातन संस्कृति में माँ लक्ष्मी जी को भगवान श्री नारायण की आह्लादिनी शक्ति माना गया है। दीपावली, धनतेरस, शरद पूर्णिमा और शुक्रवार के दिन श्री लक्ष्मी चालीसा का श्रद्धापूर्वक पाठ करने से घर से दरिद्रता और दुखों का नाश होता है।

इस चालीसा में ४० पावन चौपाइयों और दोहों के माध्यम से माता लक्ष्मी के अष्टलक्ष्मी स्वरूपों (आदि लक्ष्मी, धन लक्ष्मी, धान्य लक्ष्मी, गजलक्ष्मी, संतान लक्ष्मी, धैर्य लक्ष्मी, विजय लक्ष्मी, विद्या लक्ष्मी), क्षीरसागर निवास, विष्णुप्रिया लीला और भक्तों पर धन-धान्य की वर्षा का अलौकिक वर्णन प्रस्तुत किया गया है।

नित्य पाठ के चमत्कारी लाभ

  • स्थायी धन-समृद्धि: व्यापार और गृहस्थ जीवन में नित्य लक्ष्मी का वास होता है।
  • दरिद्रता एवं ऋण से मुक्ति: पुराने कर्जों, कंगाली और आर्थिक संकटों का नाश होता है।
  • अष्टसिद्धि एवं नवनिधि: साधक को भौतिक एवं आध्यात्मिक दोनों प्रकार की सिद्धियाँ मिलती हैं।
  • सुख-शांति एवं गृह क्लेश नाश: परिवार में आपसी प्रेम, मिठास और शांति बढ़ती है।
  • संतान एवं वंश वृद्धि: श्रद्धापूर्वक पाठ करने से सुयोग्य संतान की प्राप्ति होती है।

पाठ करने की सही विधि

  • शुभ समय एवं दिन: शुक्रवार, दीपावली अथवा धनतेरस के दिन संध्याकाल या प्रातःकाल पाठ करें।
  • आसन एवं वस्त्र: गुलाबी या लाल रंग के स्वच्छ वस्त्र पहनकर कुशा या लाल आसन पर बैठें।
  • दीपक एवं कमल पुष्प: माँ लक्ष्मी के सामने शुद्ध गाय के घी का दीपक जलाएं और लाल कमल या गुलाब का फूल अर्पित करें।
  • भोग: खीर, सफेद मिष्ठान्न या मखाने का भोग लगाकर श्रद्धापूर्वक पाठ करें।

श्री लक्ष्मी चालीसा - अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

श्री लक्ष्मी चालीसा का पाठ शुक्रवार, दीपावली, धनतेरस और पूर्णिमा के दिन करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।

हाँ, दीपावली की पावन रात्रि में माता लक्ष्मी के पूजनोपरांत ११ बार चालीसा का पाठ करने से घर में साल भर धन-समृद्धि बनी रहती है।

माँ लक्ष्मी की पूजा में शुद्ध गाय के घी का दीपक (अखंड या सामान्य) जलाना अत्यंत प्रिय माना गया है, जिससे सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।

हाँ, यदि आपको देवनागरी पढ़ने में असुविधा हो, तो देवधून पर उपलब्ध शुद्ध English Transliteration और Dual Language (दोहरी भाषा) का उपयोग कर पाठ किया जा सकता है।

श्री लक्ष्मी चालीसा के पाठ के उपरांत "ॐ जय लक्ष्मी माता" आरती का सप्रेम गायन कर कर्पूर आरती करना अत्यंत मंगलकारी माना जाता है।
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