Chalisa मराठी (Marathi) Santoshi Mata

श्री संतोषी माता चालीसा

श्री संतोषी माता चालीसा (Santoshi Mata Chalisa in Marathi)

संपूर्ण श्री संतोषी माता चालीसा (Santoshi Mata Chalisa in Marathi) ४० चौपाया, दोहे, मराठी भावार्थ व ऑडिओ सहित DevDhun वर वाचा व ऐका.

श्री संतोषी माता चालीसा - Marathi
Text:
दोहा
श्री गणपति पद पूजि करि, धरि हिय ध्यान सुजान ।
संतोषी माता भजहुं, सुख संपति कर खान ॥
चौपाई
जय संतोषी मात अनुपा । अद्भुत रूप मनोहर रूपा ॥ ॥ १ ॥
निर्मल छवि सुंदर अति पावन । जन मन मानस मोद बढ़ावन ॥ ॥ २ ॥
चारु चतुरभुज रूप सुहायो । मुकुट मनोहर शीश लहायो ॥ ॥ ३ ॥
कानन कुण्डल झलमल झलकैं । भाल विशाल तिलक छवि छलकें ॥ ॥ ४ ॥
गल मोतिन की माल बिराजै । मंद हँसी मुख चन्द्रमहिं छाजै ॥ ॥ ५ ॥
खड्ग त्रिशूल हाथ में सोहै । देखि भक्त जन को मन मोहै ॥ ॥ ६ ॥
अक्षय पात्र लिए एक हाथ । सब पर कृपा करहु जग मात ॥ ॥ ७ ॥
अभय मुद्रा जन सुखकारी । जय जय जय संतोषी महतारी ॥ ॥ ८ ॥
स्वर्ण सिंहासन राजित माता । रिद्धि सिद्धि की तुम हो दाता ॥ ॥ ९ ॥
गणपति की सुपुत्री कहलाओ । मनवांछित फल सबहिं दिलाओ ॥ ॥ १० ॥
माता रिद्धि सिद्धि के मन भायो । जनम महोत्सव सब मिलि गायो ॥ ॥ ११ ॥
संतोषी तव नाम धरायो । सकल लोक में आनंद छायो ॥ ॥ १२ ॥
शुक्रवार व्रत करै जो कोई । ताके घर आनंद नित होई ॥ ॥ १३ ॥
कथा श्रवण करै जो ध्याना । पावै सो सब सुख समाना ॥ ॥ १४ ॥
खटाई को जो त्याग करावै । माता तापर कृपा बढ़ावै ॥ ॥ १५ ॥
गुड़ और चना भोग लगावै । प्रेम सहित माता को ध्यावै ॥ ॥ १६ ॥
बांझन को सुत देत अपारा । निर्धन को धन देत उदारा ॥ ॥ १७ ॥
रोग दोष सब दूर नशावै । जो माता का सुमिरन पावै ॥ ॥ १८ ॥
कन्या पावै वर मनभावन । होवै सकल मनोरथ पावन ॥ ॥ १९ ॥
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो ध्यावै संतोषी धीरा ॥ ॥ २० ॥
गृह कलेश सब दूर पराहीं । शांति सद्भाव बसे घर माहीं ॥ ॥ २१ ॥
विद्या बुद्धि सुमति विस्तारा । माता तुम हो जगत अधारा ॥ ॥ २२ ॥
व्यापारी को लाभ करावै । नौकरी में पद-मान बढ़ावै ॥ ॥ २३ ॥
अटके काम बने सब सारे । जो जन माता तुमहिं पुकारे ॥ ॥ २४ ॥
सोलह शुक्रवार व्रत कीजै । विधि विधान सों पूजन कीजै ॥ ॥ २५ ॥
उद्यापन जब प्रेम सों होई । पावै सकल मनोरथ सोई ॥ ॥ २६ ॥
ब्राह्मण भोजन प्रेम करावै । दक्षिणा दे चरनन सिर नावै ॥ ॥ २७ ॥
खट्टी वस्तु कतहुं नहिं खावै । ताहि मात सब सुख पहुँचावै ॥ ॥ २८ ॥
नारि पुरुष जो व्रत अनुरागे । सो जन पावै भाग्य सुहागे ॥ ॥ २९ ॥
माता की महिमा अति भारी । सुर मुनि गावैं महिमा न्यारी ॥ ॥ ३० ॥
दीन दयाल कृपालु भवानी । जग में पूजित मात कल्याणी ॥ ॥ ३१ ॥
हम अनाथ शरण में आये । जो कछु भूल भई बिसराये ॥ ॥ ३२ ॥
कृपा दृष्टि कीजौ महारानी । जय संतोषी अमर कहानी ॥ ॥ ३३ ॥
दास जानि मोहि कीजै दाया । दूर करहु ममता अरु माया ॥ ॥ ३४ ॥
सदा रहो सन्मुख महतारी । संकट हरहु हमारी भारी ॥ ॥ ३५ ॥
प्रेम सहित जो चालीसा गावै । सो निश्चय भव सिंधु तरावे ॥ ॥ ३६ ॥
नित प्रति पाठ करै मन लाई । ताकी विपदा सब कटि जाई ॥ ॥ ३७ ॥
संतोषी माता सुख दाता । जय जय जय जग पालक माता ॥ ॥ ३८ ॥
मातु पिता तुम हो जग अम्बा । तुम बिनु कौन करै अवलम्बा ॥ ॥ ३९ ॥
नमो नमो संतोषी माता । सकल सिद्धि सुख की तुम दाता ॥ ॥ ४० ॥
समाप्ती दोहा
समाप्ती दोहा
संतोषी मां की कृपा, पावे जो कोई ध्यान ।
सुख संपति वैभव लहै, होवे सकल कल्यान ॥
Doha
Shree ganapati pada pooji kari, dhari hiya dhyana sujana |
Santoshi mata bhajahun, sukha sampati kara khana ||
Chaupai
Jaya santoshi mata anoopa | Adbhuta roopa manohara roopa || 1 ||
Nirmala chhavi sundara ati pavana | Jana mana manasa moda badhavana || 2 ||
Charu chaturbhuja roopa suhayo | Mukuta manohara sheesha lahayo || 3 ||
Kanana kundala jhalamala jhalakain | Bhala vishala tilaka chhavi chhalakain || 4 ||
Gala motina kee mala birajai | Manda hansee mukha chandramahin chhajai || 5 ||
Khadga trishūla hatha mein sohai | Dekhi bhakta jana ko mana mohai || 6 ||
Akshaya patra liye eka hatha | Saba para kripa karahu jaga mata || 7 ||
Abhaya mudra jana sukhakaree | Jaya jaya jaya santoshi mahataree || 8 ||
Svarna simhasana rajita mata | Riddhi siddhi kee tuma ho data || 9 ||
Ganapati kee suputree kahalao | Manavanchhita phala sabahin dilao || 10 ||
Mata riddhi siddhi ke mana bhayo | Janama mahotsava saba mili gayo || 11 ||
Santoshi tava nama dharayo | Sakala loka mein ananda chhayo || 12 ||
Shukravara vrata karai jo koee | Take ghara ananda nita hoee || 13 ||
Katha shravana karai jo dhyana | Pavai so saba sukha samana || 14 ||
Khataee ko jo tyaga karavai | Mata tapara kripa badhavai || 15 ||
Guda aura chana bhoga lagavai | Prema sahita mata ko dhyavai || 16 ||
Banjhana ko suta deta apara | Nirdhana ko dhana deta udara || 17 ||
Roga dosha saba doora nashavai | Jo mata ka sumirana pavai || 18 ||
Kanya pavai vara manabhavana | Hovai sakala manoratha pavana || 19 ||
Sankata katai mitai saba peera | Jo dhyavai santoshi dheera || 20 ||
Griha kalesha saba doora paraheen | Shanti sadbhava base ghara maheen || 21 ||
Vidya buddhi sumati vistara | Mata tuma ho jagata adhara || 22 ||
Vyaparee ko labha karavai | Naukaree mein pada-mana badhavai || 23 ||
Atake kama bane saba sare | Jo jana mata tumahin pukare || 24 ||
Solaha shukravara vrata keejai | Vidhi vidhana son poojana keejai || 25 ||
Udyapana jaba prema son hoee | Pavai sakala manoratha soee || 26 ||
Brahmana bhojana prema karavai | Dakshina de charanana sira navai || 27 ||
Khattee vastu katahun nahin khavai | Tahi mata saba sukha pahunchavai || 28 ||
Nari purusha jo vrata anurage | So jana pavai bhagya suhage || 29 ||
Mata kee mahima ati bharee | Sura muni gavain mahima nyaree || 30 ||
Deena dayala kripalu bhavanee | Jaga mein poojita mata kalyanee || 31 ||
Hama anatha sharana mein aaye | Jo kachhu bhūla bhaee bisaraye || 32 ||
Kripa drishti keejau maharanee | Jaya santoshi amara kahanee || 33 ||
Dasa jani mohi keejai daya | Doora karahu mamata aru maya || 34 ||
Sada raho sanmukha mahataree | Sankata harahu hamaree bharee || 35 ||
Prema sahita jo chalisa gavai | So nishchaya bhava sindhu tarave || 36 ||
Nita prati patha karai mana laee | Takee vipada saba kati jaee || 37 ||
Santoshi mata sukha data | Jaya jaya jaya jaga palaka mata || 38 ||
Matu pita tuma ho jaga amba | Tuma binu kauna karai avalamba || 39 ||
Namo namo santoshi mata | Sakala siddhi sukha kee tuma data || 40 ||
Closing Doha
Ending Doha
Santoshi maan kee kripa, pave jo koee dhyana |
Sukha sampati vaibhava lahai, hove sakala kalyana ||
दोहा (Dual View)
श्री गणपति पद पूजि करि, धरि हिय ध्यान सुजान ।
संतोषी माता भजहुं, सुख संपति कर खान ॥
Shree ganapati pada pooji kari, dhari hiya dhyana sujana |
Santoshi mata bhajahun, sukha sampati kara khana ||
चौपाई (Dual View)
जय संतोषी मात अनुपा । अद्भुत रूप मनोहर रूपा ॥ ॥ १ ॥
Jaya santoshi mata anoopa | Adbhuta roopa manohara roopa || 1 ||
निर्मल छवि सुंदर अति पावन । जन मन मानस मोद बढ़ावन ॥ ॥ २ ॥
Nirmala chhavi sundara ati pavana | Jana mana manasa moda badhavana || 2 ||
चारु चतुरभुज रूप सुहायो । मुकुट मनोहर शीश लहायो ॥ ॥ ३ ॥
Charu chaturbhuja roopa suhayo | Mukuta manohara sheesha lahayo || 3 ||
कानन कुण्डल झलमल झलकैं । भाल विशाल तिलक छवि छलकें ॥ ॥ ४ ॥
Kanana kundala jhalamala jhalakain | Bhala vishala tilaka chhavi chhalakain || 4 ||
गल मोतिन की माल बिराजै । मंद हँसी मुख चन्द्रमहिं छाजै ॥ ॥ ५ ॥
Gala motina kee mala birajai | Manda hansee mukha chandramahin chhajai || 5 ||
खड्ग त्रिशूल हाथ में सोहै । देखि भक्त जन को मन मोहै ॥ ॥ ६ ॥
Khadga trishūla hatha mein sohai | Dekhi bhakta jana ko mana mohai || 6 ||
अक्षय पात्र लिए एक हाथ । सब पर कृपा करहु जग मात ॥ ॥ ७ ॥
Akshaya patra liye eka hatha | Saba para kripa karahu jaga mata || 7 ||
अभय मुद्रा जन सुखकारी । जय जय जय संतोषी महतारी ॥ ॥ ८ ॥
Abhaya mudra jana sukhakaree | Jaya jaya jaya santoshi mahataree || 8 ||
स्वर्ण सिंहासन राजित माता । रिद्धि सिद्धि की तुम हो दाता ॥ ॥ ९ ॥
Svarna simhasana rajita mata | Riddhi siddhi kee tuma ho data || 9 ||
गणपति की सुपुत्री कहलाओ । मनवांछित फल सबहिं दिलाओ ॥ ॥ १० ॥
Ganapati kee suputree kahalao | Manavanchhita phala sabahin dilao || 10 ||
माता रिद्धि सिद्धि के मन भायो । जनम महोत्सव सब मिलि गायो ॥ ॥ ११ ॥
Mata riddhi siddhi ke mana bhayo | Janama mahotsava saba mili gayo || 11 ||
संतोषी तव नाम धरायो । सकल लोक में आनंद छायो ॥ ॥ १२ ॥
Santoshi tava nama dharayo | Sakala loka mein ananda chhayo || 12 ||
शुक्रवार व्रत करै जो कोई । ताके घर आनंद नित होई ॥ ॥ १३ ॥
Shukravara vrata karai jo koee | Take ghara ananda nita hoee || 13 ||
कथा श्रवण करै जो ध्याना । पावै सो सब सुख समाना ॥ ॥ १४ ॥
Katha shravana karai jo dhyana | Pavai so saba sukha samana || 14 ||
खटाई को जो त्याग करावै । माता तापर कृपा बढ़ावै ॥ ॥ १५ ॥
Khataee ko jo tyaga karavai | Mata tapara kripa badhavai || 15 ||
गुड़ और चना भोग लगावै । प्रेम सहित माता को ध्यावै ॥ ॥ १६ ॥
Guda aura chana bhoga lagavai | Prema sahita mata ko dhyavai || 16 ||
बांझन को सुत देत अपारा । निर्धन को धन देत उदारा ॥ ॥ १७ ॥
Banjhana ko suta deta apara | Nirdhana ko dhana deta udara || 17 ||
रोग दोष सब दूर नशावै । जो माता का सुमिरन पावै ॥ ॥ १८ ॥
Roga dosha saba doora nashavai | Jo mata ka sumirana pavai || 18 ||
कन्या पावै वर मनभावन । होवै सकल मनोरथ पावन ॥ ॥ १९ ॥
Kanya pavai vara manabhavana | Hovai sakala manoratha pavana || 19 ||
संकट कटै मिटै सब पीरा । जो ध्यावै संतोषी धीरा ॥ ॥ २० ॥
Sankata katai mitai saba peera | Jo dhyavai santoshi dheera || 20 ||
गृह कलेश सब दूर पराहीं । शांति सद्भाव बसे घर माहीं ॥ ॥ २१ ॥
Griha kalesha saba doora paraheen | Shanti sadbhava base ghara maheen || 21 ||
विद्या बुद्धि सुमति विस्तारा । माता तुम हो जगत अधारा ॥ ॥ २२ ॥
Vidya buddhi sumati vistara | Mata tuma ho jagata adhara || 22 ||
व्यापारी को लाभ करावै । नौकरी में पद-मान बढ़ावै ॥ ॥ २३ ॥
Vyaparee ko labha karavai | Naukaree mein pada-mana badhavai || 23 ||
अटके काम बने सब सारे । जो जन माता तुमहिं पुकारे ॥ ॥ २४ ॥
Atake kama bane saba sare | Jo jana mata tumahin pukare || 24 ||
सोलह शुक्रवार व्रत कीजै । विधि विधान सों पूजन कीजै ॥ ॥ २५ ॥
Solaha shukravara vrata keejai | Vidhi vidhana son poojana keejai || 25 ||
उद्यापन जब प्रेम सों होई । पावै सकल मनोरथ सोई ॥ ॥ २६ ॥
Udyapana jaba prema son hoee | Pavai sakala manoratha soee || 26 ||
ब्राह्मण भोजन प्रेम करावै । दक्षिणा दे चरनन सिर नावै ॥ ॥ २७ ॥
Brahmana bhojana prema karavai | Dakshina de charanana sira navai || 27 ||
खट्टी वस्तु कतहुं नहिं खावै । ताहि मात सब सुख पहुँचावै ॥ ॥ २८ ॥
Khattee vastu katahun nahin khavai | Tahi mata saba sukha pahunchavai || 28 ||
नारि पुरुष जो व्रत अनुरागे । सो जन पावै भाग्य सुहागे ॥ ॥ २९ ॥
Nari purusha jo vrata anurage | So jana pavai bhagya suhage || 29 ||
माता की महिमा अति भारी । सुर मुनि गावैं महिमा न्यारी ॥ ॥ ३० ॥
Mata kee mahima ati bharee | Sura muni gavain mahima nyaree || 30 ||
दीन दयाल कृपालु भवानी । जग में पूजित मात कल्याणी ॥ ॥ ३१ ॥
Deena dayala kripalu bhavanee | Jaga mein poojita mata kalyanee || 31 ||
हम अनाथ शरण में आये । जो कछु भूल भई बिसराये ॥ ॥ ३२ ॥
Hama anatha sharana mein aaye | Jo kachhu bhūla bhaee bisaraye || 32 ||
कृपा दृष्टि कीजौ महारानी । जय संतोषी अमर कहानी ॥ ॥ ३३ ॥
Kripa drishti keejau maharanee | Jaya santoshi amara kahanee || 33 ||
दास जानि मोहि कीजै दाया । दूर करहु ममता अरु माया ॥ ॥ ३४ ॥
Dasa jani mohi keejai daya | Doora karahu mamata aru maya || 34 ||
सदा रहो सन्मुख महतारी । संकट हरहु हमारी भारी ॥ ॥ ३५ ॥
Sada raho sanmukha mahataree | Sankata harahu hamaree bharee || 35 ||
प्रेम सहित जो चालीसा गावै । सो निश्चय भव सिंधु तरावे ॥ ॥ ३६ ॥
Prema sahita jo chalisa gavai | So nishchaya bhava sindhu tarave || 36 ||
नित प्रति पाठ करै मन लाई । ताकी विपदा सब कटि जाई ॥ ॥ ३७ ॥
Nita prati patha karai mana laee | Takee vipada saba kati jaee || 37 ||
संतोषी माता सुख दाता । जय जय जय जग पालक माता ॥ ॥ ३८ ॥
Santoshi mata sukha data | Jaya jaya jaya jaga palaka mata || 38 ||
मातु पिता तुम हो जग अम्बा । तुम बिनु कौन करै अवलम्बा ॥ ॥ ३९ ॥
Matu pita tuma ho jaga amba | Tuma binu kauna karai avalamba || 39 ||
नमो नमो संतोषी माता । सकल सिद्धि सुख की तुम दाता ॥ ॥ ४० ॥
Namo namo santoshi mata | Sakala siddhi sukha kee tuma data || 40 ||
समाप्ती दोहा (Dual View)
समाप्ती दोहा
संतोषी मां की कृपा, पावे जो कोई ध्यान ।
सुख संपति वैभव लहै, होवे सकल कल्यान ॥
Santoshi maan kee kripa, pave jo koee dhyana |
Sukha sampati vaibhava lahai, hove sakala kalyana ||

श्री संतोषी माता चालीसा का परिचय एवं धार्मिक महत्व

सनातन हिन्दू परंपरा में श्री संतोषी माता चालीसा (Shri Santoshi Mata Chalisa) देवी संतोषी की आराधना, संतुष्टि एवं पारिवारिक सुख-शांति प्राप्ति का पावन और सिद्ध स्तोत्र है। माँ संतोषी को भगवान श्री गणेश एवं माता रिद्धि-सिद्धि की दिव्य पुत्री माना जाता है। वे संतोष, सौहार्द, धैर्य और मंगलमय जीवन का वरदान देने वाली दयामयी देवी हैं।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जो भक्त शुक्रवार के दिन माँ संतोषी का व्रत रखकर इस पावन चालीसा का भक्तिपूर्वक पाठ करते हैं, उनके घर-परिवार में कलह, अभाव और अशांति का निवारण होता है तथा सुख, संतोष और समृद्धि का वास होता है। इस पृष्ठ पर आपको श्री संतोषी माता चालीसा का प्रामाणिक देवनागरी हिन्दी पाठ, English Transliteration, द्विभाषी (Dual Language) दृश्य तथा प्रत्येक चौपाई एवं दोहे का पंक्ति-दर-पंक्ति भावार्थ (Meaning) उपलब्ध है।

माँ संतोषी का स्वरूप एवं पौराणिक संदर्भ

पौराणिक लोक मान्यताओं के अनुसार, रक्षाबंधन के पावन पर्व पर जब भगवान गणेश की बहन मानसा देवी ने उन्हें राखी बांधी, तब गणेश जी के पुत्र शुभ और लाभ ने भी एक बहन की इच्छा प्रकट की। तब भगवान गणेश की प्रसन्नता एवं रिद्धि-सिद्धि के सान्निध्य से दिव्य कन्या का प्राकट्य हुआ, जिनका नाम संतोषी रखा गया, क्योंकि वे समस्त जीवों में संतोष और आनंद का संचार करती हैं।

माँ संतोषी का स्वरूप अत्यंत सौम्य, शांत और वात्सल्यमयी है। वे चतुर्भुज रूप में सुशोभित हैं, कमल के आसन पर विराजमान हैं और अपने भक्तों को अभय एवं वरद मुद्रा प्रदान करती हैं। उनके हाथों में त्रिशूल और तलवार दुष्ट प्रवृत्तियों के दमन का और मिष्ठान्न का पात्र जीवन में माधुर्य एवं संतोष भरने का प्रतीक है।

श्री संतोषी माता चालीसा पाठ के प्रमुख धार्मिक लाभ

पारिवारिक सुख व शांति

परंपरागत मान्यता के अनुसार, नियमित पाठ से परिवार में प्रेम, सौहार्द और परस्पर सद्भाव की वृद्धि होती है।

मानसिक संतोष व धैर्य

चालीसा के श्रवण व पाठ से अशांत मन को तृप्ति और धैर्य की प्राप्ति होती है, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।

मनोकामना पूर्ति

श्रद्धालु १६ शुक्रवार के व्रत के साथ इस चालीसा का पाठ कर मनोवांछित फल और सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

कष्ट व विघ्न निवारण

गणेश सुता माँ संतोषी की आराधना से साधक के समस्त कार्यों में आने वाले विघ्न शांत होते हैं।

पाठ करने की सरल विधि एवं पूजन परंपराएं

श्री संतोषी माता चालीसा का पाठ शुक्रवार के दिन विशेष रूप से किया जाता है। पाठ एवं पूजन की पारम्परिक विधि:

पाठ का उत्तम समय:

प्रातःकाल स्नान के पश्चात अथवा सांध्यकाल में स्वच्छ मन से पाठ करें। शुक्रवार का दिन माँ संतोषी की पूजा के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

पूजन सामग्री एवं नियम:

  1. स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूर्व अथवा उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें।
  2. माँ संतोषी की प्रतिमा या चित्र के समक्ष घी का दीपक और सुगंधित धूप प्रज्वलित करें।
  3. माँ को गुड़ और भुने हुए चने का भोग अवश्य अर्पित करें, जो उनका अत्यंत प्रिय नैवेद्य है।
  4. जल का कलश स्थापित करें और पुष्प, अक्षत एवं रोली अर्पित करें।
  5. महत्वपूर्ण नियम: व्रत अथवा पूजन के दिन स्वयं तथा परिवार के सदस्यों को खट्टी वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए।
  6. श्री संतोषी माता चालीसा का भक्तिपूर्वक पाठ करें, तत्पश्चात माँ की आरती कर प्रसाद वितरण करें।

माँ संतोषी एवं सम्बंधित पावन प्रार्थनाएं

माँ संतोषी एवं देवी उपासना से जुड़े अन्य पावन स्तोत्रों का भी पाठ करें:

Frequently Asked Questions (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

श्री संतोषी माता चालीसा का पाठ शुक्रवार के दिन करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है। श्रद्धालु नित्य पूजा में भी इसका पाठ कर सकते हैं।

माँ संतोषी को गुड़ और भुने हुए चने का भोग लगाना परम प्रिय माना जाता है। इसके अतिरिक्त केले और अन्य सात्विक फलों का भी अर्पण किया जाता है।

हाँ, पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार संतोषी माता के पूजन और व्रत के दिन किसी भी प्रकार की खट्टी वस्तु (जैसे नींबू, दही, इमली, अचार) का सेवन और स्पर्श करना वर्जित माना जाता है।

हाँ, देवधून पर उपलब्ध पाठ में प्रारंभिक दोहा, संपूर्ण ४० चौपाइयां और समापन दोहा पूर्ण प्रामाणिकता और शुद्धता के साथ संकलित हैं।

हाँ, देवधून पर श्री संतोषी माता चालीसा हिन्दी, English Transliteration के अतिरिक्त तेलुगु, बंगाली, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तमिल, मलयालम, ओड़िया और पंजाबी लिपियों में भी संपूर्ण रूप से उपलब्ध है।
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